लखनऊ। ऊंचे पहाड़ की वजह से घायल पत्नी को समय पर अस्पताल न पहुंचाने पर हुई मौत एक इंसान को इस कदर तोड़ देती है कि वह पहाड़ को ही तोड़ने पर आमादा हो जाता है। वह इंसान और कोई नहीं बल्कि बिहार के माउंटेनमैन दशरथ मांझी थे। उनके प्रेम, अदम्य साहस, संघर्ष और दृढ़ निश्चय को मंगलवार शाम जब मंच पर उतारा गया तो दर्शकों ने दांतों तले अंगुलियां दबा लीं। प्रस्तुति ने न सिर्फ दर्शकों की आंखें नम कीं बल्कि संवादों पर तालियां बजाने पर भी मजबूर किया।
उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की ओर से गोमतीनगर स्थित संत गाडगे प्रेक्षागृह में दो दिवसीय नाट्य उत्सव के पहले दिन नाटक ‘मांझी रे’ का मंचन किया गया। पंचम प्रकाश के लिखे और सागर सिंह निर्देशित इस नाटक का मंचन एमओयू के तहत ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय-दरभंगा के संगीत एवं नाट्य विभाग की ओर से किया गया। अकादमी के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत, उपाध्यक्ष विभा सिंह और निदेशक डॉ. शोभित नाहर ने दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया। नाटक के माध्यम से संदेश दिया गया कि मन के हारे हार है, मन के जीते जीत। नाटक में दिखाया गया कि बिहार के गया जिले के गहलौर गांव में निवासी दशरथ मांझी पत्थर तोड़ने का काम करते हैं।
कहानी में मोड़ तब आता है जब उनकी पत्नी फगुनिया पहाड़ पार करते समय गिर जाती हैं और गंभीर रूप से घायल हो जाती हैं। अस्पताल दूर होने के कारण उन्हें समय पर इलाज नहीं मिल पाता और मृत्यु हो जाती है। यह घटना दशरथ मांझी के जीवन को पूरी तरह बदल देती है। वे दृढ़ संकल्प लेते हैं कि इस पहाड़ को काटकर आम रास्ता बनाएंगे ताकि भविष्य में किसी और को ऐसी पीड़ा न सहनी पड़े। गांव के लोग शुरू में उनका मज़ाक उड़ाते हैं लेकिन दशरथ मांझी अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटते। कई वर्षों तक लगातार मेहनत करते हुए वह अकेले ही पहाड़ को काटकर रास्ता बनाते हैं। मंच पर दशरथ मांझी का किरदार रौशन कुमार दास और फल्गुनिया का प्राची कुमारी ने निभाया। अन्य कलाकारों में मोहन कुमार, मिथिलेश कुमार, दिव्या कुमारी, अर्जुन कुमार राय, चंदन कुमार, हुकुमदेव यादव, नीरज पांडेय और विजय कुमार पासवान ने भी अभिनय किया।
मंच पर जीवंत हुआ दशरथ मांझी का दृढ़ निश्चय
मंच पर जीवंत हुआ दशरथ मांझी का दृढ़ निश्चय
मंच पर जीवंत हुआ दशरथ मांझी का दृढ़ निश्चय
मंच पर जीवंत हुआ दशरथ मांझी का दृढ़ निश्चय
मंच पर जीवंत हुआ दशरथ मांझी का दृढ़ निश्चय
मंच पर जीवंत हुआ दशरथ मांझी का दृढ़ निश्चय