लखनऊ। केजीएमयू की कार्यपरिषद में दलित और पिछड़े वर्ग के प्रोफेसरों को शामिल न करने पर राजभवन ने नाराजगी जताई है। राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी डॉ. पंकज कुमार एल. जानी ने कुलपति को पत्र भेजकर मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
प्रदेश सरकार ने 2 जनवरी 2026 को केजीएमयू (संशोधन) अधिनियम 2025 लागू किया था। इसकी धारा 24(1) के तहत कार्यपरिषद में अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग के वरिष्ठतम आचार्यों को शामिल करना अनिवार्य है। इसके बावजूद केजीएमयू प्रशासन ने इन वर्गों के सदस्यों का मनोनयन नहीं किया है। इस पर विधायक जय देवी और कार्यपरिषद सदस्य डॉ. सुरेश अहिरवार ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर शिकायत दर्ज कराई थी। केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. केके सिंह का कहना है कि मनोनयन की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही नए सदस्यों को कार्यपरिषद में शामिल कर लिया जाएगा।