मऊ के समारोह में ‘बहिनजी’ का नाम न लेना पूर्व मंत्री दद्दू प्रसाद को भारी पड़ गया। बहुजन समाज पार्टी में कद्दावर नेता की छवि रखने वाले द्ददू प्रसाद की बुधवार को पार्टी से छुट्टी हो गई। पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप में उन्हें प्रदेश प्रभारी ने पार्टी से निष्कासित करने का ऐलान किया है।
कांशीराम को गुरु मानकर 1982 में डीएस-4 (दलित शोषित समाज संघर्ष समिति) के जरिए दद्दू प्रसाद ने राजनीति की शुरुआत की थी। 1984 में डीएस-4 के बसपा में विलय के साथ ही दद्दू प्रसाद का ओहदा भी बढ़ता गया। वह बुंदेलखंड में बसपा के सबसे बड़े नेताओं में शुमार हो गए। वर्ष 2007 में ग्राम्य विकास मंत्री और जोनल कोआर्डिनेटर की जिम्मेदारी निभाई।
साल 2012 में प्रदेश की सत्ता छिनने के बाद उन्हें हिमाचल प्रदेश में शिमला लोकसभा की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद साढ़े तीन साल तक वह अपने क्षेत्र से दूर रहे। तीन दिन पूर्व 25 जनवरी को मऊ के रतौरा गांव में राष्ट्रीय अति पिछड़ा वर्ग एसोसिएशन की ओर से आयोजित कर्पूरी ठाकुर जयंती समारोह में पूर्व मंत्री दद्दू प्रसाद ने अपनी टीस भी निकाली।
अपने पूरे भाषण के दौरान उन्होंने कांशीराम का ही नाम लिया। बसपा सुप्रीमो मायावती का एक बार भी जिक्र नहीं किया। इस मौके पर तीन पृष्ठीय पर्चे भी बांटे गए। दद्दू के इस रवैये की खबर बसपा सुप्रीमो तक पहुंचा दी गई।
पार्टी ने पार्टी विरोधी गतिविधि का आरोप लगा उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। प्रदेश प्रभारी रामअचल राजभर ने अपनी रिपोर्ट में हवाला दिया कि उनकी कार्यशैली को लेकर पूर्व में कई बार चेतावनी दी गई, लेकिन पार्टी विरोधी गतिविधियां जारी रहीं। इसी के आधार पर उन्हें पार्टी से निष्कासित किया गया है।