लखनऊ। शहर की बिजली आपूर्ति व्यवस्था सुधारने के नाम पर हो रहा खेल अब उपभोक्ताओं की जान पर भारी पड़ रहा है। एक तरफ ''नेताजी'' उन ओवरहेड लाइनों को अंडरग्राउंड करने का नया प्रस्ताव तैयार करा रहे हैं, जिन पर डेढ़ साल में 1000 करोड़ रुपये फूंके जा चुके हैं। दूसरी ओर, शहर से गांवों तक लगभग दो लाख घरों और दुकानों में आज भी बांस-बल्ली के सहारे बिजली पहुंच रही है।
यह अव्यवस्था महज लापरवाही नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का बड़ा संकेत है। जेई, एसडीओ और प्रॉपर्टी डीलरों की सांठगांठ से नव-विकसित इलाकों में मानक ताक पर रखकर कनेक्शन बांटे गए। आलम यह है कि 100-100 मीटर की दूरी तक सर्विस केबल को बांस के सहारे खींचकर ले जाया गया है। इन केबलों में लगे अनगिनत ''जोड़'' बारिश और धूप में स्पार्किंग का कारण बनते हैं, जिससे हर वक्त आग लगने और करंट उतरने का खतरा बना रहता है। इस बदहाली के कारण कई लोग जान भी गंवा चुके हैं।
इंजीनियर से प्रॉपर्टी डीलर जिम्मेदार
बांस-बल्ली पर अवैध तरीके से नेटवर्क फैलाकर मोटी कमाई करने वाले कई इंजीनियर खुद प्रॉपर्टी डीलिंग के धंधे में उतर आए हैं। सूत्रों की मानें तो कई जेई और एसडीओ ने नौकरी के साथ-साथ जमीन खरीदकर प्लॉटिंग शुरू कर दी है। बीकेटी जैसे क्षेत्रों में कुछ इंजीनियरों की सक्रिय भागीदारी की चर्चा है। इनमें से अधिकांश का लखनऊ से तबादला हो चुका है, लेकिन उनके द्वारा फैलाया गया मौत का जाल आज भी मौजूद है।
इन इलाकों में संकट
अंबेडकर, उतरेठिया, नादरगंज, शारदानगर, गेहरू, बनी, एफसीआई, सरोसा-भरोसा, दुबग्गा, बालाघाट, आजादनगर, अपट्रान, नूरबाड़ी, आरडीएसओ, आईआईएम रोड, न्यू कैम्पस, फैजुल्लागंज, दाउदनगर, कल्याणपुर, सूगामऊ, शिवपुरी चिनहट, कमता, अमराई, लौलाई, मोहनलालगंज, गोसाईगंज, अमेठी और अर्जुनगंज उपकेंद्र क्षेत्रों में बांस-बल्ली का नेटवर्क खुलेआम चल रहा है।
Iपूर्व में कुछ जेई और एसडीओ ने बांस-बल्ली पर कनेक्शन दिए थे, लेकिन अब यह पूरी तरह प्रतिबंधित है। अब एक भी कनेक्शन इस तरह नहीं दिया जा रहा है। यदि किसी जेई के खिलाफ ऐसी शिकायत मिलती है, तो कार्रवाई की जाएगी।I
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- वीपी सिंह, मुख्य अभियंता, जानकीपुरम जोनI
बांस बल्ली पर तार।
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