जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में आतंकियों से मोर्चा लेते हुए सोमवार को रायबरेली का लाल शहीद हो गया। सीआरपीएफ में तैनात शैलेंद्र प्रताप सिंह के शहीद होने की सूचना से हर कोई गमगीन हो गया। जैसे-जैसे शैलेंद्र की शहादत की खबर फैलती गई, लोगों का हुजूम घर पर जुटने लगा। जो भी घर पहुंचता वह बिलख पड़ता और कहता यह सब कैसे हो गया। कुछ लोग शैलेंद्र की शहादत पर गर्व जताते तो कुछ लोग उसका इस तरह से चले जाने पर दुख जताते।
मूलरूप से डलमऊ कोतवाली क्षेत्र के मीर मीरानपुर गांव के रहने वाले शैलेंद्र प्रताप सिंह वर्ष 2008 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। इस समय उनकी तैनाती सीआरपीएफ की 110वीं कंपनी में सोपोर में थी। आतंकियों से मोर्चा लेते हुए शैलेंद्र को गोली लगी, जिससे वह शहीद हो गए। शहीद के पिता नरेंद्र बहादुर सिंह रिटायर्ड आईटीआई कर्मी हैं और मां सिया दुलारी सिंह गृहणी हैं।
पत्नी चांदनी उर्फ दीपा व आठ साल का बेटा कुशाग्र है। तीन बहनें शीली, प्रीती और ज्योति हैं। मौजूदा समय में शहीद का परिवार शहर के जवाहर विहार कॉलोनी मलिकमऊ में रहता है। शैलेंद्र अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। सोमवार शाम शैलेंद्र के शहीद की खबर घर पहुंची तो परिजन दहाड़ मारकर रो पड़े। मां सिया दुलारी तो रोते-रोते बेहोश हो गई। बस एक ही रट लगाए रहीं कि उनका लाल शहीद नहीं हो सकता। वह जल्द घर आएगा।
पिता भी अपने आंसू को नहीं रोक पाए। पत्नी से जहां सुहाग छिन गया, वहीं बहनें भी भाई की मौत से बदहवास हैं। पड़ोसी भी शैलेंद्र की शहादत पर गमगीन हैं। जिसने भी जवान के शहीद होने की खबर जानी, उसके कदम उसके घर की ओर रुख करते रहे। घर के अंदर से चीखें गूंज रही हैं तो घर के बाहर बैठे पिता को लोग सांत्वना देने पहुंच रहे हैं।
शैलेंद्र की खबर पाकर पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी परिजनों से मुलाकात करके शोक संवेदना व्यक्त करते हुए सभी को ढांढस बंधाया। एडीएम प्रशासन राम अभिलाष, एसडीएम सदर शालिनी प्रभाकर, सीओ सदर डॉ. अंजनी कुमार चतुर्वेदी ने पिता नरेंद्र बहादुर सिंह के अलावा मां, पत्नी समेत अन्य परिजनों को ढांढस बंधाया और कहा कि हम सब उनके साथ हैं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष पंकज तिवारी और नगर पालिकाध्यक्ष पूूर्णिमा श्रीवास्तव के प्रतिनिधि मुकेश श्रीवास्तव ने शहीद के घर पहुंचकर परिवार से मुलाकात की। सभी ने शैलेंद्र के शहीद होने पर दुख जताया और कहा कि हम सब दुख की इस घरी में आपके साथ हैं।
शाम तीन बजे साथी ने किया फोन, बोला शैलेंद्र को गोली लग गई...
सोमवार अपराह्न शैलेंद्र के परिवार पर अचानक गमों का पहाड़ टूट पड़ा। घर के अंदर चीखें गूंजने लगी तो आसपास के लोग सन्न रह गए। शहीद के चाचा वीरेंद्र सिंह ने बताया कि शाम को तीन बजे घर वाले मोबाइल पर फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को शैलेंद्र का दोस्त बताया। उसने शैलेंद्र के फोन से ही घर वालों को फोन किया था। दोस्त ने बताया कि शैलेंद्र को गोली लग गई है। इतना कहते ही दोस्त का फोन कट गया। कुुछ देर बाद शैलेंद्र के शहीद होने की खबर भी आ गई। इतना सब कुछ बताने के बाद चाचा रो पड़े और बोले कि शैलेंद्र हमें तुुम पर गर्व है।
मां ख्याल रखना, 15 अक्तूबर को आएंगे...
शहीद शैलेंद्र प्रताप सिंह होली के पर्व पर छुट्टी लेकर घर आए थे। बताते हैं कि शैलेंद्र ने मां से कहा था कि अपना ख्याल रखना। हम 15 अक्तूबर को घर आएंगे। शैलेंद्र के घर आने का सभी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। शैलेंद्र की शहीद होने की खबर आई तो यह खुशी गम में बदल गई।
शैलेंद्र ने ही बनवाया मकान
ब्राह्मण सभा के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद कुमार मिश्रा शहीद जवान के मोहल्ले में रहते हैं। कहते हैं कि शैलेंद्र ने ही मोहल्ले में मकान बनवाया। अभी मकान का निर्माण कार्य चल ही रहा है। छुट्टी से घर शैलेंद्र आते थे उनकी मुलाकात होती थी। शैलेंद्र के शहीद होने से वह दुखी हैं। साथ ही शैलेंद्र की देश की खातिर शहादत होने से हमें गर्व भी है।
शहीद के परिजनों को 50 लाख रुपये, एक सदस्य को नौकरी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले में रायबरेली निवासी सीआरपीएफ के शहीद जवान शैलेंद्र प्रताप सिंह के शौर्य और वीरता को नमन करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने शहीद के परिजनों को 50 लाख रुपये, एक सदस्य को सरकारी नौकरी और जिले की एक सड़क का नामकरण शहीद शैलेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर करने की भी घोषणा की है।