झांसी के किसान अजित सिंह बताते हैं, उनके परिचित ने बताया कि सिमरधा में किसान के घर खुद को बीमा कंपनी का कार्यकर्ता बताने वाला शख्स आया। उसने अपना हिस्सा मांगा। जब दोनों ने पूछा तो कुछ भी बताने से कतराने लगे। शक हुआ तो उप निदेशक कृषि से शिकायत की। उन्होंने दो सितंबर को गरौठा के उप संभागीय कृषि अधिकारी शरद चंद्र मौर्य को जांच सौंपी। इसकी रिपोर्ट 15 सितंबर 2025 को सौंपी गई।
10 के बजाय 60 फीसदी दिखाई क्षति
रिपोर्ट के मुताबिक सिमरधा गांव के मनोज कुमार गुप्ता, उमेश कुमार, पूनम देवी, फूलन देवी, छवि, रेश, भारती, रोशनी देवी, राममूर्ति, उमेश ने रबी सीजन 2024 में बीमा कराया। इन्हें 10.87 लाख का भुगतान हुआ। असल में सीजन के दौरान पूरे प्रदेश में कहीं भी 10 फीसदी से ज्यादा क्षति नहीं हुई। वहीं, लेखपाल ने 60 फीसदी क्षति दिखा दी। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की संस्तुति की।
अब झांसी में भी जांच के लिए टीम गठित
लखनऊ। प्रधानमंत्री फसल बीमा में गैर ऋणी कृषकों द्वारा भूमि नहीं होने के बावजूद खरीफ-2024 एवं रबी 2024-25 में क्षतिपूर्ति लेने के मामले में झांसी में भी टीम गठित हो गई है। अमर उजाला ने खबर प्रकाशित कर बताया था कि महोबा की तरह ही झांसी और अन्य जिलों में भी करोड़ों का घपला हुआ है। शासन के निर्देश के बाद झांसी डीएम मृदुल चौधरी ने तहसीलवार अलग-अलग टीम गठित कर सात दिन में रिपोर्ट मांगी है। टीम में सबसे पहले चकबन्दी वाले ग्रामों जिनका लैंड इन्ट्रीग्रेशन नहीं हुआ है उन गांवों की जांच करेगी। इसके अन्य गावों के क्षतिपूर्ति लेने वालों की जांच करेगी। टीम को सात दिन में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।