फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फसल बीमा की कलंक कथा: पोर्टल में खेल का अंदेशा, जांच शुरू होते ही बदल गया डाटा; काफी गहरी हैं घपले की जड़ें

Sat, 27 Dec 2025 03:29 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

फसल बीमा योजना में पोर्टल में खेल का अंदेशा है। जांच शुरू होते ही डाटा बदल गया। महोबा, झांसी, मथुरा सहित अन्य जिलों में घपला हुआ है। कई गांवों के आंकड़ों में अगस्त की अपेक्षा दिसंबर में बदलाव दिख रहे हैं। 
विज्ञापन
बीमा में बेईमानी। - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और मौसम आधारित फसल बीमा योजना में घपले की जड़ें काफी गहरी हैं। जांच शुरू होते ही महोबा में कई गांवों के बीमित किसानों और रकबा का क्षेत्रफल जस का तस है, लेकिन अगस्त की अपेक्षा दिसंबर में क्लेम भुगतान की राशि बदल गई है। मथुरा में तो पोर्टल ही कई दिनों से बंद है, जिसकी वजह से किसान परेशान हैं।

विज्ञापन


फसल बीमा योजना में महोबा, झांसी, ललितपुर, मथुरा, फर्रूखाबाद सहित कई जिलों में घपला हुआ है। नली, नाले, बंजर और सरकारी जमीन पर बीमा क्लेम बांट दिया गया है। महोबा और झांसी में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। अन्य स्थानों पर जांच चल रही है। 

Trending Videos

आंकड़ों में अगस्त की अपेक्षा दिसंबर में बदलाव

इस बीच पोर्टल में बदलाव की भी शिकायत मिली है। खरीफ सीजन 2024 में प्रधानमंत्री फसल बीमा में बांटे गए क्लेम का कुछ किसानों ने विवरण निकाला है। इन किसानों ने पूरे मामले से स्थानीय प्रशासन को भी अवगत कराया गया है।

महोबा जिले के संतोषपुरा गांव में 113 किसानों को 55 लाख का भुगतान दिखाया गया, वहीं जांच शुरू होने के बाद 10 दिसंबर को पोर्टल पर उतने ही किसानों को सिर्फ नौ लाख का भुगतान दिखाया गया है। इसी तरह लुहारी गांव में अगस्त माह में 147 लाख का भुगतान दिखाया गया था, जो दिसंबर में घटाकर 39 लाख दिख रहा है।

क्लेम भुगतान कर दिया गया राशि में परिवर्तन

कुछ ऐसी ही स्थिति अन्य गांवों की भी है। महोबा में धरना दे रहे किसान नेता गुलाब सिंह कहते हैं कि अगस्त और दिसंबर माह में पोर्टल के विवरण में किसानों की संख्या, बीमित क्षेत्रफल में कोई परिवर्तन नहीं है, लेकिन क्लेम भुगतान राशि में परिवर्तन कर दिया है। 

उनका आरोप है कि यह साक्ष्य मिटाने और जांच प्रभावित करने की साजिश है। महोबा के उप कृषि निदेशक रामसजीवन का कहना है कि पोर्टल पर डाटा बदले जाने जैसा कोई मामला सामने नहीं आया है। पोर्टल शासन से संचालित होता है। इसमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ संभव नहीं है।

गांव किसानों की संख्या अगस्त में भुगतान दिसंबर में भुगतान
भटेवर कला 499  79 लाख 56 लाख
कर्री जदीद 17 35 लाख 4 लाख
सिमरिया 147 119 लाख 48 लाख
खंगार्रा 152 48 लाख 17 लाख
इंदौरा 577 110 लाख 34 लाख
मुरानी 42 49 लाख 20 लाख

33 को मिली बीमा, गांव के एक भी नहीं

कुलपहाड़ तहसील के इंदौरा गांव में खरीफ 2024 में कुल एक करोड़ 10 लाख की बीमा राशि बांटी गई है। खास बात यह है कि इस गांव में 33 लोगों को 83.49 लाख रुपये दिए गए हैं। इन 33 में एक भी इस गांव का नहीं है। 33 किसानों की सूची में उरई और हमीरपुर के निवासी है। जो महोबा जिले के हैं, वे दूसरी तहसील क्षेत्र के हैं।
विज्ञापन

एप बंद होने से मथुरा में हलचल

मथुरा के किसानों ने बताया कि उनके यहां भी फसल बीमा में गडबड़ी हुई है। जिलाधिकारी सहित अन्य अधिकारियों से शिकायत की गई। इसके बाद क्राप इंश्योरेंस ऐप को बंद कर दिया गया है। उन्होंने आशंका जताई है कि ऐप बंद करके किसानों के डाटा में हेरफेर किया जा रहा है। हालांकि इस मामले में टेक्नीकल टीम के अजय करन का कहना है कि उन्हें कोई शिकायत नहीं मिली है। संभव है कि कहीं नेटवर्क की समस्या हो।

निदेशक कृषि डॉ. पंकज त्रिपाठी ने बताया कि पोर्टल के डाटा में बदलाव संभव नहीं है। फिर भी बदलाव संबंधी कोई शिकायत मिलेगी, उसकी जांच कराई जाएगी। उसका पूरा विवरण कृषि मंत्रालय के इस पोर्टल से जुड़े तकनीकी विभाग को भेजा जाएगा। क्योंकि, यह पोर्टल और ऐप सीधे मंत्रालय से जुड़ा है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें