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हार्ट, किडनी, लिवर से चिपका था ट्यूमर, सर्जरी कर ढाई घंटे में निकाला

Sun, 29 May 2016 02:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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सीतापुर की पप्पी - फोटो : amar ujala
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सिर, पैर या फिर शरीर के किसी अन्य अंग में ट्यूमर की खबरें तो आम हैं, पर एक महिला के सभी महत्वपूर्ण अंगों को ट्यूमर ने अपनी चपेट में ले लिया था। सीतापुर निवासी पप्पी मिश्रा लंबे समय से असहनीय दर्द झेल रही थीं। शुरुआती जांच में पता चला कि रीढ़ की हड्डी से एक ट्यूमर चिपका है।
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सर्जरी से उसे निकाल दिया गया, लेकिन कुछ दिनों बाद फिर वहीं दिक्कत शुरू हो गई। इस बार जांच हुई तो पता चला कि ट्यूमर ने किडनी, लिवर फेफड़े, खून की आपूर्ति करने वाली महाधमनी (एओर्टा) और हार्ट को भी अपनी चपेट में ले लिया है।

केजीएमयू के थोरेसिक सर्जरी विभाग के डॉ. शैलेन्द्र यादव व उनकी टीम ने ढाई घंटे की जटिल सर्जरी कर इस ट्यूमर को हमेशा के निकाल दिया। खास बात है कि सभी अंगों को बचा लिया गया है।
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थोरेसिक सर्जन डॉ. शैलेंद्र यादव ने बताया कि  45 वर्षीय पप्पी मिश्रा पीठ में दर्द से परेशान रहती थी। सीतापुर में स्थानीय डॉक्टरों से इलाज से जब उसे फायदा नहीं हुआ तो केजीएमयू के न्यूरो सर्जरी विभाग में उसके परिवारीजनों ने इलाज कराया। वहां जांच में पता चला कि रीढ़ की हड्डी से एक ट्यूमर चिपका हुआ था। इसी वजह से पीठ में उसे तेज दर्द होता था।
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डिस्चार्ज होकर घर गईं और फिर दर्द शुरू हो गया

पप्पी का सिटी स्कैन - फोटो : amar ujala
न्यूरो सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने उसके पीछे के हिस्से का ट्यूमर सर्जरी से निकाल दिया। डिस्चार्ज होकर पप्पी वापस घर चली गई लेकिन लगभग ढाई महीने पहले उसे फर से दर्द शुरू हो गया।

वह वापस केजीएमयू पहुंची तो छाती (थोरेस्क) के अन्य हिस्सों में ट्यूमर फैला हुआ मिला। इसके बाद उसे थोरेस्क सर्जरी विभाग के लिए रेफर कर दिया गया।

पप्पी को उसके परिवारीजन यदि सही समय पर केजीएमयू इलाज केलिए लेकर नहीं पहुंचते तो उसकी जान भी जा सकती थी। ट्यूमर काफी तेजी से बढ़ रहा था। इसके चलते वो एओर्टा पर दबाव बना रहा था। दबने से एओर्टा के फटने की संभावना हो सकती थी।

इससे अधिक खून निकल जाता और पप्पी का जीवन खतरे में पड़ जाता। डॉ. शैलेंद्र यादव ने बताया कि ट्यूमर को जांच के लिए भेजा गया है। इससे पता चलेगा कि उसमें कैंसर था कि नहीं। यदि कैंसर निकला तो आगे इलाज जारी रहेगा।

ये थे सर्जरी में शामिल
डॉ. शैलेंद्र यादव, डॉ. अम्बरीष कुमार, डॉ. यशपाल, डॉ. अजय पांडेय, डॉ. श्रद्धा सिंह, एनेस्थेटिस्ट डॉ. सतीश धस्माना और टीम।

दावा : पहली बार ऐसे ट्यूमर को निकाला गया

डॉ शैलेंद्र व डॉ. अम्बरीष - फोटो : amar ujala
डॉ. शैलेंद्र ने बताया कि रीढ़ की हड्डी से ट्यूमर निकलने के बाद जब दर्द से आराम नहीं मिला तो पप्पी के थोरेस्क (छाती) व उसके नीचे के हिस्से का सीटी स्कैन कराया गया।

रिपोर्ट में पता चला कि ट्यूमर उसकी रीढ़ की हड्डी के अलावा डायाफ्राम, लिवर, किडनी, हार्ट, खून की आपूर्ति करने वाली महाधमनी (एओर्टा), इन्फीरियर वेना केवा (ईवीसी) और फेफड़ों के निचले हिस्से से भी चिपका हुआ था।

इसी वजह से पप्पी को दर्द से आराम नहीं मिल रहा था। रिपोर्ट देखने के बाद उसकी सर्जरी की तैयारी शुरू की गई। पहले ही एक सर्जरी के कारण वो कमजोर थी। इसलिए कुछ दिन उसका स्वास्थ्य स्थिर होने का इंतजार किया गया।

इसके बाद पिछले मंगलवार (24 मई) को उसकी सर्जरी की गई। डॉ. शैलेंद्र ने बताया कि इस तरह के ट्यूमर को केजीएमयू में पहली बार निकाला गया है।
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सर्जरी में लगे ढाई घंटे

- फोटो : amar ujala
पप्पी का ट्यूमर निकालने में डॉ. शैलेंद्र और उनकी टीम को ढाई घंटे लगे। पीठ की तरफ दाहिने हिस्से को खोलकर ट्यूमर को निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई।

एक के बाद एक डायाफ्राम, फेफड़े, लिवर, किडनी, एओर्टा और आईवीसी से ट्यूमर को अलग किया गया। दिल से शरीर को खून की आपूर्ति करने वाली महाधमनी (एओर्टा) पर ट्यूमर काफी ज्यादा चिपका हुआ था।

उसमें क्लेम्प लगाकर खून की आपूर्ति को रोका गया फिर ट्यूमर को निकाला गया। यदि इसमें जरा सी भी गलती से एओर्टा को नुकसान पहुंच जाता तो अत्यधिक रक्तस्राव होने से मरीज की मौत भी हो सकती थी।

डॉ. शैलेंद्र यादव ने बताया कि पप्पी धीरे-धीरे स्वास्थ्य लाभ ले रही है। जल्दी ही उसे डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।
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