केजीएमयू : जन्म से नहीं था मलद्वार, डॉक्टरों ने बनाया नया
केजीएमयू के डॉक्टरों ने कोरोना संक्रमित दो नवजातों की सर्जरी कर उन्हें नई जिंदगी दी है। दोनों का जन्म से ही मलद्वार नहीं था, डॉक्टरों ने सर्जरी कर नया बना दिया। दोनों नवजातों को गुरुवार को संस्थान से छुट्टी दे दी गई है। वे कोरोना को भी मात देने में कामयाब रहे।
करीब 10 दिन पहले जन्मे दो नवजात केजीएमयू लाए गए थे। उनमें मलद्वार विकसित नहीं था। जांच के दौरान दोनों बच्चे कोरोना संक्रमित पाए गए। उन्हें लिंब सेंटर में बने कोविड हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। कोरोना अस्पताल के अधीक्षक एवं बाल शल्य चिकित्सक डॉ. जेडी रावत ने बताया कि दोनों ही शिशुओं में जन्मजात विकृति थी। पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. आनंद पांडेय एवं डॉ गौरव ने सर्जरी का फैसला लिया। उनके साथ एनेस्थीसिया से डॉ. प्रिया, डॉ. देवेंद्र, डॉ. सुमित, डॉ दीपाली, डॉ. भास्कर एवं वंदना नर्स ने सहयोग किया। सर्जरी के बाद इन्हें नवजात सघन चिकित्सा इकाई में डॉ. चंद्रकांता की देखरेख में रखा गया। अब दोनों बच्चे स्वस्थ हैं। उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है।
प्रो. जेडी रावत ने बताया कि अभी तक किसी पॉजिटिव नवजात में इस तरह की सर्जरी का मामला पंजीकृत नहीं है। ऐसे में संभावना है कि देश में इस तरह की यह पहली सर्जरी केजीएमयू के चिकित्सकों ने की है। इस उपलब्धि पर वीसी ने सर्जरी करने वाली टीम को प्रोत्साहित किया।