इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने जमानत के एक मामले में कहा कि तकनीक के दुरुपयोग से महिलाओं के प्रति अपराध बढ़े हैं। इस टिप्पणी के साथ ही कोर्ट ने सहपाठी युवती के मोबाइल पर अश्लील मैसेज भेजने और दो लाख रुपये रंगदारी मांगने के आरोपी अफरोज खां को जमानत पर रिहा करने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह ने बृहस्पितवार को यह आदेश जमानत की अर्जी को खारिज करते हुआ दिया।
हरदोई जिले के शाहाबाद थाने में आरोपी के खिलाफ पीड़िता की ओर छेड़छाड़, रंगदारी मांगने और सूचना तकनीक कानून के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसमें बताया गया था कि आरोपी ने सहपाठी युवती के मोबाइल पर अश्लील मैसेज भेजे और उसका इंस्टाग्राम व स्नैपडील आदि के अकाउंट हैक कर लिए। फिर उसके अकाउंट से वह लड़कों को अश्लील मैसेज भेजने लगा। उसने युवती को धमकाया कि अगर पुलिस को वह इस संबंध में कोई जानकारी दी तो उसके पूरे परिवार को मार डालेगा।
साथ ही आडियो और वीडियो क्लिप वायरल कर देगा। कोर्ट ने कहा कि जमानत की मांग करने वाला युवक अपने सहपाठी युवती की जिंदगी को बर्बाद करने का आरोपी है। ऐसे में आरोपी को जमानत पर रिहा करने का कोई आधार नहीं है। वहीं, अभी केस का विचारण होना है। लिहाजा जमानत अर्जी को खारिज किया जाता है।