फार्मा उद्यमी शैलेंद्र रघु का कहना है कि शहर में 12-15 यूनिटें हैं, जिनमें से अधिकांश शिथिल हो गई हैं। सिर्फ इंजेक्शन निर्माण वाली यूनिटें चल रही हैं। सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि 250 करोड़ टर्नओवर से नीचे के लिए यह दिशा निर्देश है, इसमें पांच करोड़ वाला छोटा उद्यमी भी परेशान हो रहा है। प्रदेश भर में लखनऊ, गौतमबुद्धनगर और नोएडा में करीब 450 यूनिटें हैं जो 5 करोड़ से लेकर 100 करोड़ तक के टर्नओवर तक की यूनिटें हैं, वह पूरी फैक्टरी कैसे बदलेंगे। किसी के पास जगह की समस्या है तो किसी के पास मशीनों की। सरकार ने इस मद में कर्ज की भी व्यवस्था नहीं की है।