इंडियन चेस्ट सोसाइटी के प्रेसीडेंट डॉ. सूर्यकांत का कहना है कि लोग जान बचाने के लिए रेमडेसिविर के पीछे भाग रहे हैं। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि यह जान बचाने के काम नहीं आती है। अक्तूबर में एक ट्रायल हुआ था, उसमें पाया गया कि जिन्हें यह इंजेक्शन दिया गया, उसकी जान बचाई नहीं जा सकी। यहां तक कि डब्ल्यूएचओ ने भी इसे देने से मना किया। यह रामबाण नहीं है। समय पर रोग की पहचान, समय पर इलाज से सबकुछ ठीक होगा।