केंद्र सरकार की ओर से माननीयों के हित में सर्वोच्च अदालत के आदेशों की काट करते हुए जो नया अध्यादेश लाया गया, उससे यूपी के भी कई माननीयों को भी राहत मिली है।
सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ महीनों पहले जब दागी जनप्रतिनिधियों के पर कतरे थे, उसके बाद से प्रदेश की जेलों में बंद कई माननीयों की गतिविधियां ठंडी पड़ गई थीं।
अब जब लोकसभा चुनाव सामने हैं, ऐसे में अब इन माननीयों की गतिविधियों में भी तेजी आएगी।
वर्तमान में कौमी एकता दल के विधायक मुख्तार अंसारी, विधान परिषद सदस्य एसपी सिंह और भाजपा विधायक संगीत सोम जेल में हैं।
कई और माननीय जेल में थे, पर इनमें से कुछ जमानत पर और कुछ अदालत से बरी होकर बाहर आ चुके हैं।
वहीं पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी सरीखे कुछ ऐसे माननीय भी जेल में हैं, जिन्होंने पिछली बार विधानसभा का चुनाव ही नहीं लड़ा।
जानकार बताते हैं कि अधिकतर माननीय जिनके खिलाफ मुकदमे दर्ज हैं, उन्हें अगर अदालत से सजा होती है तो वह कई वर्षों की होगी।
ऐसे जनप्रतिनिधियों को अंगुली पर गिना जा सकता है, जिनके खिलाफ मामूली या राजनीतिक गतिविधियों के तहत अभियोग दर्ज हैं। उन्हें अदालत से अगर सजा मिलती भी है तो वह नाम मात्र की ही होगी।
बहरहाल, मौजूदा समय में भले ही जेल में निरुद्ध माननीयों की संख्या गिनती की हो, लेकिन विधानसभा से लोकसभा तक में उत्तर प्रदेश के कई माननीय ऐसे हैं, जिनके दामन दागदार हैं।
इलेक्शन वॉच संस्था के आंकड़ों के मुताबिक यूपी के कुल 403 विधायकों में से 189 पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
इनमें सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी के कुल 224 विधायकों में से 111 पर मुकदमे हैं, जबकि बहुजन समाज पार्टी के 80 विधायकों में से 29, भारतीय जनता पार्टी के 47 विधायकों में से 35 और कांग्रेस के 28 विधायकों में से 13 के खिलाफ आपराधिक धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं।
प्रदेश के जिन 189 विधायकों पर मुकदमे दर्ज हैं, उनमें से 98 पर हत्या, बलात्कार, अपहरण जैसे संगीन व गंभीर धाराओं में अभियोग पंजीकृत हैं।
इनमें टॉप थ्री में बीकापुर से विधायक मित्रसेन यादव, सकलडीहा से विधायक सुशील सिंह और जसराना के विधायक रामवीर सिंह के नाम शामिल हैं।