पूर्वांचल के माफियाओं में मुख्तार अंसारी चर्चित नाम है। उस पर हत्या, हत्या की कोशिश और अपहरण के 44 केस दर्ज हुए। उस पर टाडा, मकोका और पोटा भी लगा, लेकिन वह सबसे बच निकला।
हत्या के ज्यादातर मामलों में वह आईपीसी की धारा 302 के साथ 120-बी (आपराधिक षडयंत्र) का मुजरिम रहा, लेकिन कहीं सुबूतों के अभाव में तो कहीं गवाहों के मुकरने के बाद मामले बंद होते रहे।
वाराणसी में कोयला कारोबारी नंद किशोर रुंगटा के अपहरण व हत्या में मुख्तार का नाम आया। हालांकि सीबीआई जांच में वह सुबूतों के अभाव में बरी हुआ। रुंगटा विहिप के कोषाअध्यक्ष थे। मुख्तार का नाम 1988 में पहली बार हत्या के मामले में सामने आया।
इस बीच, मुख्तार ने सरकारी ठेकों पर कब्जा करना शुरू कर दिया। 1996 में पहली बार विधायक बना तो बृजेश गैंग से आमने-सामने मुठभेड़ होने लगी।
गाजीपुर के उसरी चट्टी में हुए गैंगवार में मुख्तार के तीन लोग मारे गए और बृजेश घायल हो गया।
दोनों गैंग को 2002 तक पूर्वांचल का सबसे खूंखार गैंग कहा जाने लगा। आरोप है कि 13 जनवरी 2004 को लखनऊ के दिलकुशा में बृजेश ने मुख्तार के काफिले पर हमला बोल दिया।
हालांकि मुख्तार बच निकला। इस मामले में बृजेश सिंह, कृष्णानंद राय, मुन्ना सिंह, अजय सिंह समेत कई को नामजद किया गया। एक साल बाद 2005 में इलाहाबाद के पास एके 47 से कृष्णानंद राय समेत आधा दर्जन से अधिक लोगों को भून दिया गया। आरोप मुख्तार पर लगा। मामला दिल्ली की सीबीआई कोर्ट में चल रहा है।