आखिरकार वही हुआ जिसका अंदेशा था। हजरतगंज पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही और सेक्स रैकेट संचालिका भाग गई।
रैकेट संचालिका पर हजरतगंज पुलिस की इस मेहरबानी पर एसएसपी प्रवीण कुमार ने हैरानी जताते हुए कहा कि लापरवाही क्यों बरती गई? इस बाबत जानकारी ली जाएगी।
चर्चा यह भी है कि राजधानी के कई रसूखदार और बड़ों के चेहरे बेनकाब होने के चलते ही पुलिस रैकेट संचालिका को पकड़ने से बच रही थी।
उधर, सेक्स रैकेट की शिकार युवती की गुमशुदगी की एफआईआर में धाराएं बदलने के लिए लिखा पढ़ी की जा रही है।
सूबे के वीवीआईपी इलाके हजरतगंज में डॉली नाम की महिला लंबे अरसे से ब्यूटी पार्लर की आड़ में सेक्स रैकेट चला रही है।
रैकेट से बचकर भागी एक युवती को पांच फरवरी को हजरतगंज पुलिस ने बरामद किया। इस खुलासे के बावजूद पुलिस ने डॉली को गिरफ्तार करने की कोशिश नहीं की।
इस दौरान पीड़िता लगातार हजरतगंज पुलिस के ऊपर डॉली पर मेहरबानी का आरोप लगाती रही,लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
दो हफ्ते बीतने के बाद भी कार्रवाई न होने पर बुधवार रात एसएसपी ने आखिरकार गिरफ्तारी का आदेश दिया। हालांकि,तब तक देर हो चुकी थी।
पुलिस टीम के पहुंचने पर डॉली के फ्लैट पर ताला लटका मिला। एसएसपी ने इस मामले में हजरतगंज पुलिस की लापरवाही स्वीकार की है।
साथ ही कहा कि पंद्रह दिन तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया?इसकी जानकारी ली जाएगी। सूत्रों के मुताबिक इसके लिए खुद पुलिस जिम्मेदारी है।
कहा तो यह भी जा रहा है कि एसएसपी की सख्ती के बाद पुलिस ने ही उसे भगा दिया।
एसएसपी ने कहा कि सेक्स रैकेट के चंगुल से भागी युवती के परिवार ने गुमशुदगी की जो एफआईआर लिखाई थी,उसमें ही डॉली का नाम जोड़कर जिस्मफरोशी की धाराएं शामिल की जाएंगी।
यूं खुला सेक्स रैकेट
डालीबाग के एक अपार्टमेंट में रहने वाली डॉली ने तीन साल पहले हजरतगंज निवासी एक किशोरी को घरेलू काम के लिए रखा था। छह माह बाद ही किशोरी को जिस्मफरोशी के धंधे में उतार दिया। बीती 20 जनवरी को लड़की किसी तरह चंगुल से भाग निकली।
पिता ने हजरतगंज कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। पांच फरवरी को पुलिस ने उसे दिल्ली से बरामद किया। पीड़ित के सीधे आरोप और मजिस्ट्रेटी बयान के बावजूद पुलिस अंजान बनी रही।