सआदतगंज के कागजी टोला सेमराही मोहल्ले की एक चूड़ी फैक्ट्री में सात
बच्चों को बंधक बनाकर मजदूरी कराई जा रही थी।
सोमवार दोपहर सूचना पर पुलिस व
एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने संयुक्त टीम बनाकर छापेमारी के बाद
बच्चों को मुक्त कराया और फैक्ट्री चला रहे तीन भाइयों समेत पांच को दबोच
लिया।
सआदतगंज
थानाध्यक्ष समर बहादुर सिंह के मुताबिक, सुबह स्थानीय नागरिकों ने चूड़ी
फैक्ट्री में बच्चों को बंधक बनाकर काम कराए जाने की जानकारी दी थी।
सूचना
पर करीब डेढ़ बजे पुलिस टीम व एंटी ट्रैफिकिंग यूनिट के कांस्टेबल दिलीप
चंद्र ने चूड़ी फैक्ट्री में छापेमारी की। अचानक हुई इस कार्रवाई से
फैक्ट्री में अफरा-तफरी मच गई।
फैक्ट्री मालिक व अन्य कर्मचारी भागने लगे।
पुलिस ने फैक्ट्री चला रहे बिहार के नालंदा पनहेस्सा निवासी मो. खुर्शीद,
मो. तैय्यब, मो. मुन्नी, मो. अली व मो. मुफीद को दबोच लिया। पकड़े गए
आरोपियों में फैक्ट्री संचालक खुर्शीद, तैय्यब व मुन्नी सगे भाई हैं।
पुलिस
ने फैक्ट्री मालिकों की शिनाख्त पर वहां काम कर रहे सात बच्चों को मुक्त
कराया। सभी बच्चों की उम्र सात से 13 वर्ष के बीच थी। इन बच्चों से चूड़ी में नग लगवाने का काम कराया जा रहा था।
पुलिस
की सूचना पर चाइल्ड लाइन, श्रम विभाग के श्रम परिवर्तन अधिकारी भी आ गए।
इसके बाद सभी बच्चों का मेडिकल परीक्षण कराया गया फिर बाल कल्याण समिति के
आदेश पर उन्हें मोहन रोड स्थित राजकीय बाल गृह भेज दिया गया।
पुलिस ने
फैक्ट्री मालिकों समेत पांचों आरोपियों के खिलाफ 307 (5), भादवि 23/26
किशोर न्याय अधिनियम 2000, 3/14 बालश्रम प्रतिसेध अधिनियम 1986 के तहत
कार्रवाई की है।
मुंबई, दिल्ली में तीस हजार में बेचे जा रहे मासूम फैक्ट्री
में मिले बच्चे बिहार से तस्करी कर लाए गए थे। यह सभी बिहार के नालंदा,
गया व नेवादा के रहने वाले हैं।
पुलिस की मानें तो स्थानीय गिरोह गरीब
परिवारों के बच्चों को नौकरी दिलाने का लालच देकर बहला-फुसलाकर ले आते हैं।
बच्चों से चूड़ी में नग लगवाने का काम कराया जाता है।
काम में निपुण होने
पर बच्चों को मुंबई व दिल्ली में फैक्ट्री मालिकों को 25 से 30 हजार रुपये
में बेच देते हैं। मालिक बच्चों को बंधक बनाकर उनसे मनमर्जी काम करवाते
हैं।
बच्चों को फैक्ट्री के बाहर नहीं निकलने दिया जाता। उन्हें दोनों समय
भोजन व पहनने को मामूली कपड़े दिए जाते हैं। पुलिस बच्चों की तस्करी करने
वाले गिरोहों की छानबीन में जुटी है।