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...तो फिर क्या सच है युवतियों के धड़ व पैर मिलने का

Tue, 08 Dec 2015 11:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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दो युवतियों की हत्या करके सिर, धड़ व पैर फेंके जाने की सनसनीखेज वारदात के पांच दिन बाद भी दो जिलों की पुलिस, क्राइम ब्रांच व सर्विलांस सेल के हाथ खाली हैं।
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युवतियों की न शिनाख्त हो सकी और न ही बोरों पर लिखे कोड के आधार पर आटा व चावल की बिक्री का इलाका चिह्नित किया जा सका। तफ्तीश के नाम पर सिर्फ कयास लगाए जा रहे हैं।

मड़ियांव क्षेत्र में कॅरिअर डेंटल कॉलेज के पास शुक्रवार सुबह दो युवतियों के पैर एक बोरे में बंद मिले। वहां से एक किमी. दूर आईआईएम रोड की सर्विस लेन के किनारे सौ मीटर की दूरी में अलग-अलग बोरों में दो युवतियों के धड़ बरामद हुए।
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इससे एक दिन पहले बृहस्पतिवार को सीतापुर के मानपुर थाने के कमियापुर में पुलिया के नीचे रखे ट्रॉली बैग में दो युवतियों के सिर मिले थे। मानपुर व मड़ियांव थाने में हत्या व साक्ष्य मिटाने का मुकदमा दर्ज हुआ।

सनसनीखेज वारदात पर आईजी व डीआईजी ने न सिर्फ मौका मुआयना किया, बल्कि अपने अनुभव के आधार पर दोनों जिलों की पुलिस को निर्देश दिए। क्राइम ब्रांच व सर्विलांस सेल को भी सुराग लगाने का जिम्मा सौंपा गया, लेकिन पांच दिन बाद भी नतीजा शून्य है।
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आखिर कौन थीं युवतियां

आईजी जोन जकी अहमद व डीआईजी रेंज डीके चौधरी का मानना है कि दोनों युवतियों की लखनऊ में शिनाख्त के डर से कातिलों ने उनके सिर 84 किमी. दूर सीतापुर के गांव कमियापुर में पुलिया के नीचे छिपाए। अगले ही दिन सिर बरामद हो जाने से घबराए कातिलों ने युवतियों के धड़ व पैर बोरों में बंद करके सड़क किनारे फेंके। उस समय तक धड़ व पैरों से दुर्गंध आनी शुरू हो गई थी।

अफसरों का मानना है कि युवतियों का कत्ल मड़ियांव या आसपास के इलाके में कर उनके शरीर के टुकड़े किए गए। इसी आशंका के चलते आईजी ने मड़ियांव व उससे सटे इलाकों में गहन छानबीन के आदेश दिए गए। धड़ व सिर मिलने के चार दिन बाद भी शिनाख्त न होने से तय हो चला है कि युवतियों के कातिल उनके अपने ही थे। सवाल है कि युवतियां कौन थीं?

ब्रोकरों से संपर्क साधने के निर्देश
डीआईजी डीके चौधरी ने इंस्पेक्टर मड़ियांव संतोष कुमार सिंह को इलाके में मकान किराए पर दिलाने वाले ब्रोकरों से संपर्क करके दोनों युवतियों के बारे में छानबीन के निर्देश दिए। उन्होंने आशंका जताई कि अन्य जिले या बिहार अथवा झारखंड की दोनों युवतियां अपने किसी करीबी के साथ लखनऊ आई और किन्हीं कारणों के चलते करीबी ही उनकी जान का दुश्मन बन गया।

हत्या करके शरीर के चार टुकड़े किए और उन्हें ट्रॉली बैग व तीन बोरों में भरकर फेंका। संभव है कि उसने मकान मालिक व आसपास के लोगों को दोनों युवतियों के अपने मूलनिवास लौट जाने की जानकारी दे रखी हो।

इसलिए भी आ रही हैं दिक्कतें

आईजी जोन का कहना है कि दो युवतियों के सिर, धड़ व पैर मिलने की विभिन्न चैनलों व अखबारों में प्रमुखता से खबर छपी। इसके बावजूद शिनाख्त नहीं हो सकी।

सिर्फ पांच स्थानों से लापता युवतियों के परिवारीजनों ने पुलिस से संपर्क किया। इनमें आशियाना, गोंडा व लखीमपुर खीरी के मोहम्मदी क्षेत्र से लापता दो बहनों के परिवारीजन थे।

इनके अलावा अलग-अलग स्थानों से लापता दो युवतियों के परिवारीजनों ने फोटो, कपड़े आदि देखे। सवाल है कि ऑनर किलिंग या अवैध संबंधों के चलते कत्ल की स्थिति में युवतियों के दोस्त या परिवारीजन अथवा आसपास के लोगों से उनकी गुमशुदगी की सूचना मिलती।
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साप्ताहिक बाजार के दुकानदारों से तहकीकात

डीआईजी रेंज ने युवतियों के धड़ व पैर फेंकने में इस्तेमाल टाट से बने थैले ग्रामीण या साप्ताहिक बाजार से खरीदे जाने की आशंका जताई है। धड़ और पैर बृहस्पतिवार रात फेंके गए। इस आधार पर उन्होंने अमीनाबाद व महानगर पुलिस को साप्ताहिक बाजार में दुकान लगाने वाले व्यापारियों से तहकीकात के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि बुधवार को महानगर व बृहस्पतिवार को अमीनाबाद में साप्ताहिक बाजार लगती है। जिस ट्रॉली बैग में युवतियों के सिर बरामद हुए। उस पर एक कट तो था लेकिन हैंडिल पर पन्नी चढ़ी थी।

चुनाव में व्यस्त रही पुलिस
सीतापुर के मानपुर थाने में दर्ज हत्या व साक्ष्य मिटाने के मुकदमे की तफ्तीश कर रहे एसओ एएच जैदी ने बताया कि पंचायत चुनाव में व्यस्तता के चलते युवतियों के डीएनए टेस्ट की कार्रवाई नहीं की जा सकी। वह मंगलवार को डीएनए टेस्ट व युवतियों की सही उम्र जानने के लिए लिखापढ़ी करेंगे।

इसी तरह, मड़ियांव थाने की भी फोर्स चुनाव ड्यूटी में व्यस्त रही। मुखबिर तंत्र व जमीनी नेटवर्क ध्वस्त होने की वजह से लोगों से जानकारी एकत्र करने में दिक्कत आ रही है। सुरागरसी में दक्ष चंद सिपाही इलाके में भटक रहे हैं।
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