मड़ियांव प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार सिंह के मुताबिक पीड़िता सिर्फ बहन का नाम लेती है। इसके अलावा मां और पा ही बोल पाती है। ऐेसे में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी बिना युवती की मदद के आरोपी तक पहुंचना।
पुलिस ने जांच देहरादून से शुरू की, फिर लखनऊ पहुंची। यहां रहने की तारीख से युवती की रिपोर्ट के आधार पर गर्भ की गणना की गई। इसके आधार पर तारीख निकाली गई, लेकिन कुछ खास सुराग नहीं लगा। पुलिस ने पीड़िता के घर में काम करने वाले नौकरों व कुछ अन्य लोगों से भी पूछताछ की। कई स्थानों के सीसीटीवी फुटेज निकलवाए पर कुछ हाथ न लगा।
तीन के खून का लिया नमूना
क्षेत्राधिकारी अलीगंज दीपक कुमार सिंह के मुताबिक पुलिस ने समर्पण डे केयर फाउंडेशन पर नजर रखनी शुरू की। तारीख से युवती के संस्था में रहने का भी खुलासा हुआ। इसके बाद संस्था में तैनात तीन पुरुषों पर निगरानी बढ़ाई गई। संदिग्ध मानते हुए इनके खून का नमूना लिया गया। इसके लिए मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस ने नमूना डीएनए जांच को भेजा।
क्षेत्राधिकारी के मुताबिक कुछ दिन पहले डीएनए रिपोर्ट पुलिस के हाथ लगी। इसके मुताबिक समर्पण डे-केयर फाउंडेशन का प्रिंसिपल डॉ. खुशाल सिंह युवती के गर्भ में पलने वाले 19 सप्ताह के भ्रूण का बॉयोलॉजिकल पिता है।
पुलिस के मुताबिक खुशाल सिंह मूलरूप से उत्तराखंड के नैनीताल स्थित रिहाड़ तल्ला का रहने वाला है। वह अलीगंज में राम-राम बैंक के पास एसबीआई कॉलोनी में रहता है। पुलिस ने उसे शुक्रवार सुबह दबोच लिया। आरोपी ने जुर्म कुबूल कर लिया।
उसे दबोचने में प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार सिंह के मुताबिक, एसएसआई मो. अहमद, उपनिरीक्षक संजय मिश्रा, कांस्टेबल अरविंद सिरोही, मनोज कुमार ने अहम भूमिका निभाई।