थाने में फरियादी की पिटाई का पता चलते ही मीडियाकर्मी वहां एकत्र हो गए और मोबाइल फोन से वीडियो बनाना शुरू किया तो चौकी प्रभारी भड़क गए। उन्होंने मीडियाकर्मियों से भी अभद्रता व धक्का-मुक्की की और उनके मोबाइल फोन छीन लिए।
आक्रोशित मीडियाकर्मियों ने एसएसपी दीपक कुमार को पुलिस के रवैए की जानकारी दी जिसके बाद कारोबारी को निजी मुचलके पर छोड़ने और दरोगा को चौकी से हटाने का आदेश दिया गया। राजा का 18 साल पहले फूलजहां से निकाह हुआ था। उसके एक बेटा व दो बेटियां हैं। पुलिस की पिटाई से उसके हाथ की एक अंगुली चोटिल हो गई है।
दरोगा का रूप देख पिता से लिपटकर रोने-चीखने लगा मासूम
दरोगा का रूप देखकर राजा का बेटा मो. अहसान सहम गया। वह पिता से लिपटकर रोने-चीखने लगा। दरोगा ने उसकी शर्ट पकड़कर खींचा और किनारे फेंक दिया। राजा बेटे को उठाने के लिए लपका तो उसे लात मार दी। इसके बाद उसे लॉकअप में बंद कर दिया गया।
मासूम को पिता से खींचकर दूर करते मासूम।
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राजा हवालात से इंसाफ की गुहार लगाता रहा और उसका मासूम बेटा थाने के एक कोने में पिता की बेचारगी देखकर सुबकता रहा। इस दौरान थाने के किसी पुलिसकर्मी पर पिता-पुत्र की मिन्नतों का असर नहीं हुआ। करीब तीन घंटे तक थाने में चौकी प्रभारी अपनी मनमानी करते रहे और इंस्पेक्टर रविंद्र नाथ राय के कानों में जूं तक नहीं रेंगी।
मुख्यमंत्री से डीजीपी तक की नसीहतें काम नहीं आईं
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर डीजीपी ओपी सिंह तक पुलिस की छवि सुधारने के लिए भागीरथ प्रयास कर रहे हैं। हर कार्यक्रम और बैठक में वह पुलिस को अपना व्यवहार सुधारने और फरियादियों की धैर्यपूर्वक पीड़ा सुनने व आम जनता से दोस्ताना संवाद करने की नसीहत देते हैं।
हालांकि, राजधानी पुलिस पर इन नसीहतों का जरा भी असर नहीं पड़ रहा। पुलिसकर्मियों का कोई न कोई ऐसा मामला सामने आ ही जाता है जिससे सवाल उठने लगते हैं।