जब पीड़ित वाहन लेने कस्टम कार्यालय पहुंचा तो वाहन छोड़ने के एवज में 10 हजार रुपये मांगे गए। असमर्थता जताने पर चार हजार में सौदा तय हुआ। सात अप्रैल तक पैसे देने की बात तय होने पर कस्टम अधिकारियों ने वाहन दे दिया। उस दिन पैसे नहीं आने की बात करके 10 अप्रैल को पीड़ित कस्टम ऑफिस पहुंचा और कस्टम अधीक्षक कृष्ण कुमार गुप्ता, इंस्पेक्टर अनिल कुमार शर्मा और सिपाही लल्लन खान से पैसे देने को लेकर की गई बात रिकॉर्ड कर ली और यह रिकॉर्डिंग सीबीआई को सौंप दी।
सीबीआई की 10 सदस्यीय टीम बुधवार रात यहां पहुंच गई थी। बृहस्पतिवार दोपहर करीब 3:30 बजे प्रेम किशोर कस्टम गया तो इंस्पेक्टर शर्मा ने पैसे मांगे और जेब में रख लिए। सीबीआई की टीम ने इंस्पेक्टर के साथ लल्लन खान को रिश्वत लेते दबोच लिया। इंस्पेक्टर लखेड़ा ने बताया कि आरोपियों में कस्टम अधीक्षक के खिलाफ भी मामला दर्ज है और उनके आवास गाजियाबाद में कार्रवाई के लिए देहरादून से टीम पहुंच चुकी है। सीबीआई टीम में डीएसपी आईएमएस नेगी, इंस्पेक्टर शैलेंद्र मयाल, सुनील लखेड़ा, हरीश खर्कवाल, उपनिरीक्षक नवनीत, डीएस रावत, हरीश गोस्वामी, कपिल अलावत, एमएस खर्कवाल, आरएम नेगी आदि थे।