मेहनत की न दौड़-भाग। पसीना भी नहीं बहाया। साइबर ठगों ने दिमाग लगाया और कंप्यूटर पर बैठे-बैठे ही करोड़ों का फ्रॉड कर डाला।
नाइजीरियन गैंग के शातिरों ने लोगों की छोटी-छोटी लापरवाही को हथियार बना उन्हें ही चूना लगा दिया। पुलिस ने साइबर ठगी की दुनिया में सक्रिय ऐसे लोगों से सतर्क रहने के लिए जनता से अपील की है।
गैंग का सरगना नाइजीरिया का जस्टी है। वह नाइजीरिया में बैठकर भारत सहित पाकिस्तान,बांग्लादेश भूटान,नेपाल सहित कई देश के लोगों को बैंक की तरफ से रोज हजारों स्पैम ईमेल भेजता है। मेल में अकाउंट वेरीफिकेशन का फॉर्म होता है। ज्यादातर जान ही नहीं पाते कि यह शातिर ठग की चाल है।
अधिकांश फॉर्म में मांगा गया ब्यौरा उपलब्ध करा देते हैं। अकाउंट के बारे में शुरुआती जानकारी मिलने के बाद शातिरों का अगला लक्ष्य होता है पासवर्ड हासिल करना। इसके लिए जस्टी ने दो-तीन लड़कियां रखी हैं। जो बैंक बन अकाउंट होल्डर को फोन करती हैं और पासवर्ड हासिल कर लेती हैं।
ठग इतने शातिर हैं कि शिकार से फोन पर बात करते-करते ही अकाउंट हैक कर लेते हैं। शातिर पैसे का लेन-देन करने के लिए सिर्फ आईसीआईसीआई बैंक का ही इस्तेमाल करते थे। कारण,इस बैंक की प्रोसेसिंग फास्ट है जिससे पैसा तुरंत ट्रांसफर हो जाता है।
इसके अलावा आईसीआईसीआई बैंक में वन टाइम पासवर्ड का सिंगल सिक्योरिटी कोड लगता है,जबकि अन्य बैंकों में डबल सिक्योरिटी कोर्ड की व्यवस्था है। सीओ ने बताया कि जस्टी अपने एजेंटों को ब्लैकबेरी मोबाइल (बीबीएम) एप्लीकेशन पर अकाउंट की आईडी भेजता है।
इस वक्त जस्टी ने साइबर ठगों को जो अकाउंट नंबर दिया है वह आईसीआईसीआई मुंबई की बकोला ब्रांच में जबंगा डेनियल का है। सीओ बताते हैं कि जिस केस में मोटी रकम का ट्रांजैक्शन होता है,वह सलीम उर्फ मिर्जा को दिए जाते हैं। ऐसे केस में सलीम डुप्लीकेट सिमकार्ड इश्यू करा लेता है।
बीते दिनों नोएडा की कंपनी से 31 लाख की ठगी डुप्लीकेट सिमकार्ड इश्यू कराकर ही की गई थी। सीओ ने बताया कि साइबर ठगों ने कमरे में बैठे-बैठे ही करोड़ों रुपयों का फ्रॉड किया है। उन्होंने कहा कि हो सकता है जस्टी जैसे कई और नाइजीरियन गैंग इसमें लगे हों।
रिटायर्ड डीजी आरसी शर्मा फोन कर रुपये उड़ाने वाले बदमाश को सलाखों के पीछे देखने से पहले ही दुनिया से रुखसत हो गए। उनकी सक्रियता की वजह से ही साइबर सेल ठगों के इस गैंग का भंडाफोड़ कर सकी है।
रिटायर्ड डीजी लगभग रोज साइबर सेल के प्रभारी सुरेश चंद्र मालवीय और सीओ हजरतगंज दिनेश यादव से मिलकर केस की प्रगति पूछते थे।
कहते थे कि ईमानदारी का पैसा है, यूं ही नहीं छोड़ेंगे। पुलिस सूत्रों ने बताया कि रिटायर्ड डीजी अपने साथ हुई ठगी से खासे विचलित थे और फोन करने वाले को सलाखों के पीछे देखना चाहते थे। हालांकि, यह विडंबना ही है कि फोन करने वाले की गिरफ्तारी से 48 घंटे पहले ही उन्होंने दुनिया से विदाई ले ली।
शातिरों की गिरफ्तारी की सूचना पर साइबर सेल पहुंची रिटायर्ड डीजी की पत्नी कुमुदनी शर्मा ने कहा भी कि बदमाशों की वजह से उन्होंने दम तोड़ा है।
बताया कि कई दिन से बीमार थे और मेयो अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था। उन्होंने चार फरवरी को अंतिम सांस ली। बेटा आदित्य शर्मा अमेरिका में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है।