राजधानी में ठगी का धंधा धड़ल्ले से चल रहा है। कानूनी दांव पेच व पुलिस के लचर रवैये से वाकिफ ठग लोगों को झांसे में फंसाकर लाखों का वारा-न्यारा कर रहे हैं।
शुक्रवार को राजधानी के विभिन्न थाना क्षेत्रों में जमीन व मकान के नाम पर फर्जीवाड़ा कर ठगों ने लाखों का चूना लगाया। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
इंस्पेक्टर मोहनलालगंज कमरुद्दीन के मुताबिक, गौरा गांव के राम नरेश पंचायत सचिव से रिटायर हैं। रामनरेश का एक भतीजा वीरेंद्र सिंह गांव पर ही साथ रहता है। जबकि वीरेंद्र का भाई करुणा सिंह आशियाना के रजनीखंड में रहता है।
दोनों भाइयों ने 27 अक्टूबर वर्ष 2007 में अपने चाचा रामनरेश को जमीन में निवेश कर दोगुना लाभ कमाने की स्कीम समझाई और जाल में फंसा लिया। दोनों ने चाचा को आशियाना में एक प्लाट दिखाया और आठ लाख रुपये में सौदा तय कराया।
रामनरेश ने अपने भतीजों को छह लाख रुपये की चेक और दो लाख रुपये नगद दिए। 22 दिसंबर 2012 को रामनरेश ने जमीन के बारे में पूछा तो भतीजों ने जमीन सुरक्षित होेने का झांसा देकर गौरा गांव में ही एक और जमीन दिलाने का झांसा देकर 6.50 लाख रुपये ले लिए और जमीन की रजिस्ट्री अपने और पत्नी के नाम करा ली।
इसके बाद भतीजों ने गौरा गांव में मौजूद रामनरेश की दो बीघे जमीन का भी चुपचाप सौदा कर अमित मिश्रा नामक युवक से छह लाख रुपये ले लिए।
जमीन बेचने के खुलासे के बाद चाचा रामनरेश ने पूरे मामले की पड़ताल की तो पता चला कि, आशियाना में उसकी कोई जमीन नहीं है। गौरा गांव की जमीन की रजिस्ट्री भी भतीजों ने अपने नाम करा ली।
इसके बाद उन्होंने पुलिस में मामला दर्ज कराया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। दूसरी ओर एक जालसाज ने एलडीए के मकान के नाम चार लाख रुपये एडवांस के तौर पर ले लिया। फिर मकान बेचने से इंकार कर दिया।
इंस्पेक्टर गोमतीनगर अजीत सिंह चौहान के मुताबिक, विकासखंड निवासी प्रभात कुमार सिंह ने बताया कि आजमगढ़ के रानी की सराय रामपुर टडवा निवासी बृजेश यादव से 4 मई 2011 को गोमतीनगर के आवास जी-3 अफोर्ड बिल आवासीय योजना सेक्टर-1 में मकान संख्या सी-20/ 31 खरीदने के लिए अनुबंध पत्र भरा था।
शर्तों के मुताबिक बृजेश को 60 हजार रुपये नगद व शेष राशि 3.40 लाख रुपये एलडीए के ट्रेजरी चालान व बैंक ड्राफ्ट से किया। रुपये मिलने के कुछ दिन बाद बृजेश यादव ने न तो मकान की लिखापढ़ी कराई और न ही रुपये वापस किए।