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पहले करोड़ों की मूर्तियां चुराई फिर कर दी शिक्षक की हत्या

Sun, 20 Apr 2014 05:27 AM IST
विवेक त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ
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बालागंज में घर पर घुसे बदमाशों के शिकार शिक्षक विजय कुमार सिंह (55) ने शनिवार दोपहर दम तोड़ दिया। भाई राजेश ने ठाकुरगंज थाने में अज्ञात बदमाशों के खिलाफ जानलेवा हमले की एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसे हत्या की धाराओं में बदल दिया गया है।
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पुलिस मामले को रंजिश की नजर से देख रही है, जबकि परिवारीजन लूट की आशंका जता रहे हैं। पुलिस ने परिवार के सदस्यों, किरायेदार, ड्राइवर सहित कई लोगों से पूछताछ की।

एसएसपी प्रवीण कुमार ने बताया कि विजय ने दोपहर करीब सवा बारह बजे दम तोड़ दिया।

उन्होंने कहा कि शुरुआती पड़ताल में पुलिस को कुछ ऐसे सुराग मिले हैं,जिससे हमले के पीछे रंजिश की बात सामने आ रही है।

एसएसपी का कहना है कि घर में घुसा व्यक्ति विजय का परिचित था। उसने या उसके साथियों ने ही वारदात की है। वारदात के पीछे प्रॉपर्टी विवाद के ही संकेत मिल रहे हैं।
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हालांकि विजय के परिवार के सदस्यों ने रंजिश की बात से इन्कार किया है। परिवार ने अष्टधातु की छह मूर्तियां गायब होने की जानकारी देते हुए कहा कि मूर्तियां लूटने के लिए ही हमला किया गया था।

पुलिस ने परिवार के सदस्यों से रिश्तेदार बलभद्र के साथ चल रहे प्रॉपर्टी विवाद के बारे में जानकारी ली।

हालांकि भाई राजेश ने हमले में बलभद्र का हाथ होने की आशंका को सिरे से नकार दिया। पुलिस ने मकान के ऊपरी हिस्से में रहने वाले किरायेदार के कमरे का ताला तोड़कर तलाशी ली।

कमरे से रायबरेली निवासी अंशू श्रीवास्तव का आईकार्ड मिला है।

पुलिस ने अंशू को फोन किया, उसने गुड फ्राइडे की छुट्टी के चलते घर आने की बात कही। पुलिस ने उसे पूछताछ के लिए बुलाया है। अंशू एक निजी कॉलेज से बीटेक द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा है।

पुलिस ने विजय को कार चलाना सिखा रहे ड्राइवर से भी संपर्क किया है।

विजय काकोरी के सरसंडा ब्लाक में प्राथमिक विद्यालय में वरिष्ठ अध्यापक थे। भुइय्यन देवी मंदिर से चंद कदम दूर स्थित मकान में शुक्रवार रात करीब आठ बजे बदमाशों ने ताबड़तोड़ चाकू मारकर उन्हें लहूलुहान कर दिया था।

विजय के शोर मचाने पर आसपास के लोगों को वारदात का पता चला था।

बेटी ने किया अंतिम संस्कार
पत्नी सुषमा और बेटे अवींद्र की मौत के बाद विजय के परिवार में सिर्फ बेटी अनुप्रिया ही है। अनुप्रिया सॉफ्टवेयर इंजीनियर है और दिल्ली में माइक्रोसॉफ्ट कंपनी में नौकरी कर रही है।

उसने ऋषि परिहार से लव मैरिज की है। हमले की जानकारी पर पहुंची अनुप्रिया ने पिता का अंतिम संस्कार किया।

पुरातत्व विभाग से रजिस्टर्ड थी अष्टधातु की मूर्तियां
भाई राजेश का कहना है कि नबीपनाह स्थित पैतृक आवास में करीब साठ साल पहले अष्टधातु की नौ मूर्ति मिली थीं। मूर्तियां गांव में ही बने ठाकुर मंदिर में रखी थीं।

कुछ साल पहले तीन मूर्ति चोरी हो गईं,जिसके बाद बाकी मूर्तियां विजय बालागंज स्थित अपने घर ले आए थे।

सभी छह मूर्तियां घर पर बने मंदिर में ही रहती थी,जो गायब हैं। विजय का कहना है कि मूर्तियां पुरातत्व विभाग से रजिस्टर्ड हैं। मार्केट में इनकी कीमत तीन करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
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हालांकि ग्रामीण के अनुसार कोई मूर्ति थी ही नहीं।
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