आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि जेल परिसर में सुनील राठी की ही चलती थी। सुनील राठी के लिए खाना, कपड़ा और अन्य सामान उसके घर से आता था, जिसकी कोई जांच नहीं की जाती थी। जेल के अंदर ही नहीं बाहर भी राठी के चाहने वालों की संख्या कम नहीं है। जेल के बाहर हत्या की खबर आने पर राठी के समर्थकों का जमावड़ा शुरू हो गया। इन लोगों ने पुलिस के सामने चेतावनी दी कि सुनील राठी को कुछ नहीं होना चाहिए।
एक महीने पहले कौन मिला था राठी से?
सूत्रों की मानें तो लगभग एक महीने पहले पूर्वांचल के एक बाहुबली ने जेल के अंदर राठी से मुलाकात की थी। माना जा रहा है कि उसी समय से बजरंगी की हत्या का ताना-बाना बुना जा रहा था। मुन्ना को पहले जून में ही बागपत की अदालत में पेश होना था, लेकिन बीमारी का हवाला देकर वह दो तारीखों पर उपस्थित नहीं हुआ। इस बार जब कोर्ट ने पेशी की तारीख तय की तो उसे हर हाल में पेश करने का फरमान सुनाया गया। सूत्रों का कहना है कि तीन दिन पहले एक अन्य व्यक्ति ने जेल में राठी से मुलाकात की। इसकी रजिस्टर में कोई एंट्री नहीं है।
पुलिस ने मुन्ना के साथ रात में साथ रहने वाले विक्की सुनहरा से भी पूछताछ की है। सुनहरा ने बताया कि मुन्ना के पास कोई असलहा नहीं था। वह सुबह सवा पांच से साढ़े पांच बजे के बीच उठा था। छह बजे बैरक खुलने के बाद बाहर आया जहां, राठी से मुलाकात हुई। सुनहरा ने बताया कि वह बाथरूम चला गया इसी बीच गोलियों की तड़तड़ाहट से वह डर गया। जब बाहर आया तो देखा सामने मुन्ना की लाश पड़ी थी।
एसटीएफ ने बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या के मुख्य आरोपी सुनील राठी से मंगलवार को पूछताछ की। राठी ने एसटीएफ को भी वही बात बताई है, जो स्थानीय पुलिस और जेल अधिकारियों से कही थी।
एसटीएफ के अनुसार, राठी ने कहा कि सुबह चाय के समय मुन्ना बजरंगी और उसके बीच किसी बात को लेकर कहा सुनी हुई और बजरंगी ने उसके ऊपर पिस्टल तान दी।
आत्म रक्षा के लिए उसने मुन्ना बजरंगी से पिस्टल छीन कर उसे ही मौत के घाट उतार दिया, लेकिन राठी की थ्यौरी न तो स्थानीय पुलिस के और न ही एसटीएफ के गले उतर रही है।
मुन्ना बजरंगी की हत्या के मामले में डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने को कहा कि उसकी पत्नी सीमा सिंह की ओर से दी गई तहरीर पर अलग से एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। पूर्व में जेल प्रशासन की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे में ही इस तहरीर को शामिल कर विवेचना की जाएगी। डीजीपी ने यह जानकारी यहां एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद मीडियाकर्मियों को दी।
उन्होंने कहा कि मुन्ना बजरंगी की हत्या के मामले में पुलिस से कोई चूक नहीं हुई है। पुलिस न्यायालय के आदेश का पालन कर रही थी और उसे पूरी सुरक्षा मुहैया कराई गई थी। बजरंगी को दो एम्बुलेंस और पर्याप्त पुलिस बल के साथ झांसी से बागपत जेल लाया गया था। 12 घंटे के सफर में कहीं कोई दिक्कत नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि मुन्ना बजरंगी की हत्या जेल के अंदर हुई। इस पूरे मामले को मुख्यमंत्री ने भी गंभीरता से लिया है। न्यायिक जांच, मजिस्ट्रेटी जांच और विभागीय जांच के साथ-साथ पुलिस भी इस मामले में विवेचना कर रही है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण में जिसकी भी लापरवाही होगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मुन्ना बजरंगी (फाइल फोटो)
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गौरतलब है कि बजरंगी की पत्नी सीमा ने तहरीर में जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह, पूर्व पुलिस अधिकारी जीएन सिंह, जीएन सिंह के बेटे प्रदीप सिंह समेत कई लोगों को पति की हत्या के लिए जिम्मेदार माना है।