गोली मारकर चालक की हत्या के बाद कार लूटकर भागे बदमाश बृहस्पतिवार को पुलिस के हत्थे चढ़ गए। आशियाना पुलिस को अंबेडकर विश्वविद्यालय के सामने शहीद पथ पर चेकिंग के दौरान बदमाशों को पकड़ने में सफलता मिली।
आरोपियों के पास से लूटी गई दो लग्जरी गाड़ियां बरामद हुई हैं। पूछताछ में हत्या और लूट करने वाले गिरोह का खुलासा हुआ है। पकड़े गए बदमाशों के वारदात के तरीके का पता चलने पर पुलिस भी सकते में आ गई। मिली जानकारी के आधार पर गिरोह के बाकी बदमाशों की तलाश की जा रही है।
वहीं, एसएसपी ने खुलासा करने वाली टीम को 10 हजार रुपये नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है। एसओ आशियाना सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि अंबेडकर विवि के सामने शहीद पथ पुल के नीचे चेकिंग के दौरान रायबरेली की तरफ से आ रही स्विफ्ट डिजायर कार रोकी गई।
कार पर लगाया दोपहिया का नंबर
कागज न दिखा पाने पर कार सवार दोनों लोगों से पूछताछ शुरू की गई। शक के आधार पर तलाशी में एक के पास से तमंचा बरामद हुआ। हिरासत में लेने पर पता चला एक जौनपुर के शिकरारा क्षाना क्षेत्र के शहपुर गांव का निवासी रमजान अहमद और दूसरा अमेठी के मोहनगंज स्थित गांव ढोढनपुर का रहने वाला है।
पड़ताल में कार पर लिखा नंबर वाराणसी की एक दोपहिया का निकला। नंबर प्लेट भी फर्जी पाए जाने पर पुलिस ने सख्ती शुरू की। आरोपियों ने कार लूट की होने कई सनसनीखेज वारदात अंजाम देने का भी खुलासा किया। पता चला कि दिसंबर में आरोपियों ने आलमबाग से बुक कार के चालक जितेंद्र कुमार गुप्ता की जौनपुर में गोली मारकर हत्या के बाद स्विफ्ट लूटी थी।
वहीं के बदलापुर थानाक्षेत्र में 24 दिसंबर को उसका शव पड़ा पाया गया था। मूल रूप से बलिया निवासी जितेंद्र के शव की शिनाख्त छह जनवरी को हो सकी थी। निशानदेही पर लूटी गई एक इनोवा भी बरामद हुई है।
यूं अंजाम देते थे वारदात
गिरोह के बदमाश टूर एवं ट्रैवेल्स के दफ्तरों में फोन कर गाड़ी बुक कराते थे। ऐसे में उन्हें न तो सामने जाना पड़ता और न ही आईडी देनी पड़ती। इससे पकड़े जाने की आशंका भी कम रहती। आमतौर पर यात्री बनकर फोन करते और गाड़ी रेलवे स्टेशन जैसी जगह पर बुलाते थे। इसके बाद सवार होकर दूसरे शहर के लिए रवाना होते और रास्ते में मौका देकर चालक की हत्या के बाद गाड़ी लूटकर फरार हो जाते।
पूछताछ में रमजान अहमद के एमसीए पास होने का पता है। मूलरूप से जौनपुर निवासी रमजान आशियाना के फिरंगीखेड़ा इलाके में किराए पर रहता है। पिता याकूब अहमद रिटायर्ड सैनिक हैं। शार्टकट से पैसा कमाने के चक्कर में अपराध के रास्ते पर चल निकला।
पता चला है कि वह खुद भी कई जगह ड्राइवर की नौकरी कर चुका है। इसी की आड़ में ऐसी एजेंसियों को चिह्नित करता था, जो बिना आईडी गाड़ी भेजने को तैयार हो जाते हैं।