देहरादून की छात्रा पर पिछले साल तेजाब फेंकने वाले 55 वर्षीय विष्णु नारायण शिवपुरी को एडीजे कोर्ट ने सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
कोर्ट ने उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। विशेष न्यायाधीश लल्लू सिंह ने पेपरमिल महानगर कालोनी निवासी विष्णु को दोषी करार देते हुए कहा कि जुर्माना अदा नहीं करने पर उसके एक साल की सजा और भुगतनी पड़ेगी।
इस मामले में हाईकोर्ट से विष्णु को जमानत मिल गई थी। तब पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
दोस्त की बेटी को लाया था घर
दरिंदा विष्णु छात्रा के पिता का दोस्त था और उसे बेटी बनाकर आगे की पढ़ाई के लिए देहरादून से लखनऊ ले आया था। यहां लाकर वह इसके बाद शादी के लिए दबाव बनाने लगा। यहां तक कि कोर्ट में फर्जी दस्तावेज लगाकर उसे पत्नी बताने की कोशिश भी की।
इस पर भी छात्रा नहीं टूटी तो उस समय तेजाब फेंक दिया जब वह हनुमान सेतु मंदिर दर्शन करने के लिए गई थी। अटैक में छात्रा का चेहरा तो बच गया था, लेकिन उसके कपड़े पूरी तरह जल गए थे।
10 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस पी सथाशिवम
और जस्टिस रंजन गोगोई ने विष्णु की जमानत रद्द करते हुए जेल भेजने का आदेश
दिया था। साथ ही ट्रायल कोर्ट को छह महीने में सुनवाई पूरी करने का आदेश
दिया था। इसके आदेश के बाद छह महीने के अंदर ही ट्रायल कोर्ट ने अपना फैसला
सुना दिया।
क्या कहा कोर्ट और वकील ने?
‘पीड़िता विष्णु के दोस्त की बेटी है। उम्र में भी दोगुने से ज्यादा का अंतर है। ऐसे में उसके प्रति नरमी बरतने का कोई औचित्य नहीं। उसके अपराध के लिए अधिकतम दंड मिलना चाहिए।’
- एडीजे कोर्ट
कोर्ट का फैसला एतिहासिक है। सुप्रीम कोर्ट के छह महीने के समय को पूरा होने से पहले ही माननीय कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया। तेजाब फैंकने वाले विष्णु नारायण शिवपुरी को सात साल का कठोर कारावास और एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है। आरोपी ने लड़की की जिंदगी को नरक बना दिया था। इससे दूसरे एसिड अटैक के मामलों में भी तेजी लाने में मदद मिलेगी।
-सुनील कुमार त्रिपाठी, वकील, पीडित पक्ष
'एक लाइन ने जिंदगी बना दी थी नर्क'
‘ये मेरी बीवी है।’ उसकी इस एक लाइन ने आठ साल से मेरी जिंदगी नरक बना दी। इस अभिशाप के साथ जी ही रही थी कि उसने तेजाब फेंककर जलाने की कोशिश की।
भगवान की कृपा थी कि बच गई। अदालत के इस फैसले ने मेरा हौसला बढ़ाया है। अब वो हाईकोर्ट जाए या फिर सुप्रीम कोर्ट, वहां भी उसे सजा दिलवाऊंगी।
सोमवार को एडीजे कोर्ट का फैसला आने के बाद उसका चेहरा चमक उठा। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में उसने कहा-मेरी जिंदगी उसने नरक बना दी। बेटी बना के लाया था और कागजातों में उसने मुझे अपनी बीवी दिखा दिया।
कई बार आत्महत्या करने की कोशिश की
मन में रह-रहकर यही सवाल उठता-आखिर कब तक हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और सरकारी दफ्तरों का चक्कर काटना पड़ेगा।
कई बार आत्महत्या की कोशिश कर चुकी हूं। एक बार नींद की गोलियां खाने वाली थी...खैर परिवार वालों ने देख लिया सो नहीं खा सकी।
सुप्रीम कोर्ट ने मेरे दर्द को समझा। दरिंदे की जमानत खारिज कर दी। ट्रायल कोर्ट को भी त्वरित सुनवाई के निर्देश दिए। उस आदेश के पांच महीने में ही यह फैसला आ गया।