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नाबालिग लड़की को भगाकर की थी शादी, कोर्ट ने सुनाई सजा

Sat, 21 Sep 2013 10:20 AM IST
टीम डिजिटल/लखनऊ
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अपनी ही पत्नी का अपहरण करने वाले को अब सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा भुगतनी पड़ेगी।
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उसे 45 हजार रुपये जुर्माना भी भरना पड़ेगा। दरअसल आरोपी ने नाबालिग का अपहरण कर लिया था और बाद में उससे शादी रचा ली थी। जैसे ही अदालत ने पति को सजा का फैसला सुनाया, कोर्ट के बाहर तीन साल के बेटे को गोद में लिए खड़ी पत्नी फूट-फूट कर रो पड़ी।
अपर सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार ने संतोष उर्फ मटालू को अपनी पत्नी (पूर्व में नाबालिग) के अपहरण का दोष्ाा मानते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास व 45 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। कोर्ट ने जुर्माने की आधी रकम वादी को देने का आदेश दिया है।
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बहला-फुसलाकर भगाया था
कोर्ट में सरकारी वकील ने बताया कि वादी अच्छे लाल शर्मा ने बाजार खाला थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 18 दिसंबर 2009 को अपनी दुकान पर गया था।

इस दौरान संतोष उनकी 16 वर्षीय पुत्री को बहला-फुसलाकर भगा ले गया। आरोप है कि संतोष उनकी बेटी से शादी करना चाहता था।

विवेचना के दौरान पुलिस ने 7 फरवरी 2010 को मरकरी रोड फैक्टरी के पास से आरोपी को गिरफ्तार कर पीड़िता को भी बरामद कर लिया था। पुलिस ने विवेचना के बाद संतोष उर्फ मटालू के खिलाफ चार्जशीट लगाई।
वहीं युवती ने अपने कलमबंद बयान में मजिस्ट्रेट को बताया था कि वह अपनी मर्जी से संतोष के घर गई थी। संतोष उसे भगाकर नहीं ले गया था।

क्या कहा पत्नी ने?
युवती ने बताया कि 19 दिसंबर को उसने कोर्ट मैरिज कर ली थी। कोर्ट में ट्रायल के दौरान युवती ने बताया था कि घटना के समय वह बालिग थी।

पैसों के लालच में उसके पिता 45 वर्ष के व्यक्ति से उसका विवाह करना चाहते थे। युवती ने बयान देकर बताया कि वह अपना अच्छा-बुरा समझती थी।

उसने संतोष के साथ अपनी मर्जी से विवाह किया था, न कि संतोष ने उसके साथ बलात्कार किया। युवती ने बताया कि उसके पिता ने उसकी आयु तीन वर्ष घटाकर लिखवाई थी तथा झूठी रिपोर्ट दर्ज करा दी।
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वहीं कोर्ट ने युवती को पक्षद्रोही घोषित करते हुए कहा कि साक्ष्यों के आधार पर युवती की आयु घटना के समय 17 वर्ष 3 माह थी।

18 वर्ष से कम उम्र होने के कारण युवती स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने या कार्य करने के योग्य नहीं थी। बालिग होने तक उसके नैसर्गिक संरक्षक पिता थे। आरोपी ने युवती को उसके नैसर्गिक संरक्षक के संरक्षण से हटाया था।
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