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बिरादरी आड़े आई तो पेड़ से लटके प्रेमी-प्रेमिका

Mon, 23 Feb 2015 11:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ।
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मोहनलालगंज इलाके में शनिवार देर रात प्रेमी युगल ने पेड़ की एक ही डाल से दो फंदे कसे और फांसी लगा ली। उनके प्यार में बिरादरी आड़े आ रही थी।
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युवती की शादी तय होने से दोनों हताश थे। ग्रामीणों ने सुबह दोनों के शव पेड़ से लटके देख सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस दोनों शव पोस्टमार्टम के लिए भेजने के साथ तहकीकात शुरू की।

पुलिस के मुताबिक, गांव गढ़ी परवल पश्चिम के कुलदीप रावत (20) और प्रीति लोध (19) के शव रविवार सुबह जामुन के पेड़ की एक ही डाल से लटके देखकर भीड़ लग गई। चौकीदार नोखेलाल की सूचना पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची।
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पेड़ की जड़ के पास दोनों की चप्पलें रखी थी। प्रीति अपनी सलवार के फंदे से लटक रही थी और कुलदीप उसके दुपट्टे के फंदे से लटका था।

कुलदीप के शव के पास बिलख रही मां अनीता ने जानकारी दी कि उसका बेटा शनिवार सुबह आठ बजे मोलहे के खेत में पानी लगाने के लिए घर से निकला था। दोपहर दो बजे लौटा और खाना खाने के बाद टार्च लेकर फिर निकला था।

प्रीति बोली, 'अब कभी घर नहीं आऊंगी'

प्रीति की मां चंद्रावती ने बताया कि शनिवार देरशाम खाना खाकर सभी लोग सो गए। रात 11:15 बजे आंख खुली तो प्रीति बिस्तर पर नहीं थी। घर में नजर न आने पर उसने प्रीति के मोबाइल पर कॉल की। उसने कहा कि अब कभी घर नहीं आएगी।

इसके बाद उसका मोबाइल बंद हो गया। चंद्रावती ने परिवार के लोगों को जगाया और प्रधान अनिल यादव के  पास जाकर प्रीति के लापता होने और मोबाइल पर बातचीत की जानकारी दी। प्रधान ने सुबह खोजने की सलाह दी, लेकिन सुबह प्रीति व कुलदीप के शव लटके मिले।

3 मार्च को होनी थी प्रीति की शादी
गांव में तहकीकात में पुलिस को पता चला कि पांचवीं पास कुलदीप और आठवीं तक पढ़ी प्रीति काफी समय से एक-दूसरे से प्यार करते थे। कुछ दिनों पहले प्रीति के परिवारीजनों को भनक लगी। उन्होंने ऐतराज जताया और कुलदीप से दूर रहने की हिदायत दी।

इस बीच प्रीति के परिवार वालों ने उसके  लिए रिश्ता ढूंढा और निगोहां के गांव मदारपुर के एक युवक से उसकी शादी तय कर दी। तीन मार्च की तिथि निश्चित होने के बाद से प्रीति काफी उदास और कुलदीप बेचैन था।

पेड़ पर नहीं चढ़ पाती थी प्रीति

प्रीति व कुलदीप ने शनिवार शाम संक्षिप्त मुलाकात में साथ मरने का इरादा बना लिया था। प्रीति को पता चला कि कुलदीप खेत में पानी लगा रहा है। वह शाम छह बजे नित्यक्रिया के बहाने घर से निकली और कुलदीप से मुलाकात कर लौट आई।

दोनों ने रात को आखिरी मुलाकात का इरादा बना लिया था। परिवारीजनों के सो जाने के बाद प्रीति दबे पांव घर से निकली। खेत पर इंतजार कर रहे कुलदीप के साथ मौत को गले लगा लिया।

चंद्रावती रो-रोकर कह रही थी कि उसकी बेटी प्रीति पेड़ पर नहीं चढ़ पाती थी। वह 12 फीट ऊंची डाल पर कैसे पहुंची? पुलिस का मानना है कि कुलदीप पहले पेड़ पर चढ़ा और उसने सहारा देकर प्रीति को चढ़ाया। डाल पर बैठकर दोनों ने फंदे कसे और उस पर झूल गए। 
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मौत के बाद भी न‌‌‌हीं आने दिया करीब

रूढ़िवादी परंपराओं से जकड़े परिवारीजनों ने प्रीति व कुलदीप के जीवन में उनके जज्बात समझे और न ही मरने के बाद उनके प्यार को कुबूल किया।

दोनों के शव एक ही डाल पर फंदे से लटके मिले। सीएचसी से लेकर पोस्टमार्टम हाउस तक दोनों को एक साथ रखा गया। पोस्टमार्टम के बाद दोनों के शव लेकर निकले परिवारीजन गांव पहुंचे तो रास्ते अलग हो गए। खेत में चिता सजाकर प्रीति की अंत्येष्टि की गई, जबकि कुलदीप का शव गांव की दूसरी दिशा में श्मशान में ले जाकर दाहसंस्कार किया गया।

प्रीति व कुलदीप की मौत पर दोनों के परिवारीजनों में अनबन के चलते गांव में पुलिस की ड्यूटी लगाई गई है। इसके साथ गांव के संभ्रांत लोगों को प्रीति के पिता हरिश्चंद्र व कुलदीप के पिता रामलाल से बातचीत करके दोनों परिवारों में मतभेद दूर कराने को कहा गया है।
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