एलडीए के नटवर लाल बाबू मुक्तेश्वर नाथ ओझा
- फोटो : amar ujala
एलडीए के नटवर लाल बाबू मुक्तेश्वर नाथ ओझा को भूखंडों के समायोजन में धोखाधड़ी करने के आरोप में वीसी प्रभु एन सिंह ने जेल भेजवा दिया। वीसी ने बाबू को अपने कार्यालय बुलाकर वहीं से पुलिस की हिरासत में सौंप दिया।
देर शाम एलडीए की ओर से मुकदमा दर्ज कराने के लिए गोमतीनगर थाने में तहरीर दी गई। वहीं, देर रात पुलिस ओझा के राजनीतिक रसूख के आगे झुक गई और उसे थाने में ही छोड़ दिया।
करीब दोपहर 1:30 बजे बाबू मुक्तेश्वर नाथ ओझा को एलडीए वीसी ने अपने कार्यालय बुलाया। इसके बाद बाबू से गोमतीनगर और गोमतीनगर विस्तार में हुए भूखंड़ों के समायोजन की फाइलों के बारे में पूछा गया। वीसी का कहना है कि यह बाबू करीब 150 फाइलें गुम कर चुका है। उससे यह फाइलें वापस करने को कहा गया था। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।
इसके अलावा विराटखंड गोमतीनगर में 2.5 करोड़ के भूखंड 2/271 और गोमतीनगर विस्तार के तीन अन्य भूखंडों के समायोजन में फर्जीवाड़े में भी यह बाबू शामिल था। जांच में यह शिकायतें सही पाए जाने पर बुधवार को वीसी ने बाबू मुक्तेश्वर नाथ ओझा को अपने ऑफिस बुलाकर पुलिस हिरासत में सौंप दिया।
सात घंटे के बाद एलडीए ने भेजी तहरीर
क्लर्क को गिरफ्तार कर ले जाती पुलिस
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हिरासत में होने के बाद भी बाबू को पुलिस ने हवालात में नहीं रखा। उधर बाबू के वकीलों ने भी थाना पहुंचकर पुलिस से उनके मुवक्किल को हिरासत में रखे जाने पर सवाल उठाना शुरू कर दिए।
इसके बाद गोमतीनगर पुलिस ने एलडीए अधिकारियों से कहा कि तहरीर न मिलने पर पर बाबू को छोड़ देंगे। इस पर करीब सात घंटे बाद एलडीए की ओर से मुकदमा दर्ज कराने के लिए चार भूखंडों के मामले में तहरीर दी गई।
पत्नी के नाम पर फर्जी समायोजन
एलडीए की तहरीर के मुताबिक मुक्तेश्वर नाथ ओझा ने फर्जीवाड़ा कर प्रियदर्शिनी योजना से अपनी पत्नी रेनू के नाम पर विराटखंड का भूखंड 2/272 समायोजित कर लिया।
इसमें पूर्व वीसी सत्येंद्र सिंह सहित सभी लोगों के फर्जी हस्ताक्षर और 10 जाली चालान लगाकर पैसा जमा करने का दावा किया गया। मूल फाइल में इस भूखंड का समायोजन पूनम मित्तल व पवन मित्तल के नाम पर था। भूखंड की कीमत करीब 2.5 करोड़ रुपये बताई गई है।
जाली हस्ताक्षर से तीन समायोजन
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यही नहीं बाबू ने आवंटियों के भूखंडों के पूर्व वीसी सत्येंद्र सिंह के जाली हस्ताक्षर कर गोमतीनगर में भी तीन भूखंडों का समायोजन कर दिया।
इसमें आवंटी अक्षत भट्ट को 5/51 की जगह 4/546डी का समायोजन कर दिया गया। वहीं जितेंद्र कुमार को 6/203 की जगह 4/546 बी और सुनील कुमार को 6/201 की जगह 4/546सी भूखंड दे दिया गया।
पहली बार कोई क्लर्क एलडीए से गिरफ्तार
एलडीए के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि वीसी ने किसी बाबू या कर्मचारी को भ्रष्टाचार के आरोप में सीधे पुलिस हिरासत में सौंपा हो। इससे पहले इस बाबू को पूर्व वीसी सत्येंद्र सिंह ने विराटखंड के भूखंड के फर्जी समायोजन में निलंबित किया था।
मामले पर एलडीए वीसी प्रभु एन सिंह का कहना है कि चार मामलों में धोखाधड़ी कर समायोजन के अलावा ओझा बाबू पर करीब 150 फाइलें गुम करने का भी आरोप है। उस पर विभागीय कार्रवाई चल रही है। उसे नियम-कानून के मुताबिक कार्रवाई का सामना करना होगा। मामले में सचिव के माध्यम से तहरीर थाने भेज दी गई है।