इंदिरानगर में पश्चिम बंगाल के सुदीप दास को उसकी गर्लफ्रेंड की मां ने मारा था। सुदीप ने खीर और चाय में इलायची डालने से मना किया जिसे लेकर दोनों में कहासुनी हुई।
सुदीप गुस्से में छत पर चला गया तो गर्लफ्रेंड की मां भी पीछे से वहां आ गई। छत पर दोनों में फिर झगड़ा हुआ और महिला ने हॉकी से सुदीप के सिर पर कई वार किए।
मंगलवार देर रात गाजीपुर थाना में पूछताछ के दौरान आरोपी महिला ने हत्या की बात कबूल करते हुए यह जानकारी पुलिस को दी।
इससे पूर्व पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सुदीप के सिर पर चोट लगने से मौत की पुष्टि हुई थी। पोस्टमार्टम में यह भी पता चला है कि सुदीप नाबालिग था।
मां-बेटी ने सुनाई आत्महत्या की कहानी
पुलिस ने छात्रा की मां को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने सुदीप के परिवारीजनों को उसकी मौत की खबर दे दी है।
पश्चिम बंगाल के मालदा निवासी सुदीप दास का बुरी तरह से सड़ा शव सोमवार शाम इंदिरानगर के सेक्टर 11 में रहने वाली महिला के घर पर मिला था।
पुलिस ने महिला और उसकी बेटी से पूछताछ की तो दोनों ने आत्महत्या की कहानी सुनाई।
प्यार में बदली थी फेसबुक फ्रेंडशिप
पूछताछ में पता चला कि सुदीप और छात्रा में बीते वर्ष फरवरी में फेसबुक से दोस्ती हुई जो प्यार में बदल गई।
इसके बाद बीती पांच मार्च को सुदीप प्रेमिका के साथ रहने यहां आ गया। मां-बेटी का कहना था कि आपसी झगड़े के बाद सुदीप ने 14 मार्च को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
उसकी मौत से दोनों घबरा गए और घर बंद कर हरिद्वार चले गए। वहां उसकी आत्मा की शांति के लिए पूजा-पाठ कराया। मंगलवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला कि सुदीप के सिर पर भारी वस्तु से दो वार किए गए थे।
मारकर फांसी के फंदे पर लटकाया
जिस कमरे में सुदीप का शव मिला था, वहां एक हॉकी स्टिक भी पड़ी थी। देर रात पुलिस की पूछताछ में महिला ने बताया कि सुदीप 23 फरवरी को ही उनके घर आ गया था।
13 मार्च की रात उन्होंने खीर बनाई जिसमें इलायची पड़ी थी। सुदीप ने इस पर नाराजगी जताई तो महिला से झगड़ा हो गया।
अगले दिन यानि 14 मार्च की सुबह महिला ने चाय बनाई और उसमें भी इलायची डाल दी। इस पर दोनों के बीच फिर झगड़ा हुआ और सुदीप नाराज होकर छत पर चला गया।
पीछे से पहुंची महिला ने उस पर हाकी स्टिक से कई वार किए। इसके बाद नायलोन की रस्सी का फंदा बनाकर सुदीप को टांग दिया और आत्महत्या की कहानी गढ़ दी।
घर के हालात भी अजीब
महिला और उसकी बेटी का रहन-सहन भी रहस्यमय था। घर पर बेड, सोफा, टेबल नहीं है। इसकी जगह पर सीमेंट के चबूतरे बनाए गए हैं।
किचन भी गंदा पड़ा है। पुलिस के मुताबिक मां-बेटी रोज खाना नहीं पकाती बल्कि एक बार पकाकर हफ्तों उसे गरम करके खाती थीं।
एसएसपी प्रवीण कुमार के मुताबिक किशोर की मौत के मामले में मां-बेटी के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। दोनों के खिलाफ तथ्य छिपाने और पुलिस को गुमराह करने की भी धाराएं जोड़ी जाएंगी।
इलाके के डॉक्टर जेके तिवारी के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी क्योंकि उन्होंने किशोर की संदिग्ध हालात में मौत की जानकारी के बाद भी पुलिस को सूचना नहीं दी।
‘बुरी आत्माएं जीत गईं’
सुदीप को मारने के बाद 14 मार्च को छात्रा ने अपनी कॉपी में काफी रहस्यमयी बातें लिखी हैं। उसने लिखा है कि मैं प्रिंसेज हूं और सुदीप दास मेरा प्रिंस स्टीफेन है। हम आत्माएं देख सकते हैं। हम अपनी आंखों से भविष्य भी देख सकते हैं। हम फेसबुक पर मिले और एक-दूसरे से प्यार हो गया। हम आत्माओं के बारे में जानते हैं।
हम जान गए हैं कि हम एक-दूसरे के प्रिंस और प्रिंसेज हैं और एक-दूसरे से अनंत प्यार करते हैं। यहां कोई भगवान नहीं है। भगवान ने खुद कहा कि वह हम तीनों को मारने जा रहे हैं।
तब उन्होंने हमें लेजर जैसी किरणों से कष्ट दिया जो हमारे शरीर के अंगों को मौत की तरह कष्ट देती हैं। धीरे-धीरे इन आत्माओं ने हमारे प्यार को खत्म करने की योजना बना ली क्योंकि इसमें बुरी आत्माओं को मारने की शक्ति थी।
उन आत्माओं ने उसका दिमाग कंट्रोल कर लिया और उसे मार दिया। उसे आत्महत्या की तरह दिखाया लेकिन वो भगवान द्वारा मारा गया था। बुरी आत्माएं जो उसे मारना चाहती थीं, जीत गईं।
आत्माओं, लेजर किरणों से डरती थीं मां-बेटी
महिला और उसकी बेटी की बातों और घर के अजीबो-गरीब हालात से पुलिस पहले ही हैरान थी। मंगलवार को मां-बेटी के हाथों लिखे पत्रों ने उन्हें और अबूझ पहेली बना दिया।
पुलिस को छात्रा के हाथों लिखा जो पत्र मिला, अभी उसकी गुत्थी सुलझ भी नहीं सकी थी कि उसकी मां के हाथों लिखी एक चिट्ठी और सामने आ गई।
यह पत्र छात्रा की मां ने 25 मार्च को देहरादून एसपी को संबोधित करते हुए लिखा था।
पत्र में महिला ने अपना व बेटी का नाम और उम्र लिखते हुए दोनों को वर्ष 2011 से अदृश्य लेजर किरणों, हवाओं और आत्माओं से जान का खतरा बताते हुए बचाने की गुहार लगाई है।
'हम पर अदृश्य लेजर किरणें पड़ती हैं'
पत्र में महिला ने लिखा है कि हम पर अदृश्य लेजर किरणें पड़ती हैं। हवाओं, आत्माओं की अक्सर आवाजें आती हैं कि तुम्हें, तुम्हारी बेटी और उसके दोस्त को मार डाला जाएगा और सुइसाइड का केस बना दिया जाएगा।
14 मार्च को बेटी का दोस्त छत पर गया था पर वह नहीं रहा। हम लोग ऊपर गए तो उसका फेस बदला हुआ था। डरकर अपनी बेटी को बचाने के लिए भागी परंतु कोई फायदा नहीं हुआ।
मेरी बेटी पर भी अटैक किया गया। मैं देहरादून में अपनी बेटी को बचाने का प्रयास कर रही हूं। वह महंत इंदिरेश अस्पताल में भर्ती है। अब मेरी बारी है।
मुझे मार डाला जाएगा। मेरा मेडिकल कराया जाए मेरे दांतों में जहर जा चुका है। मेरी किडनी, लिवर खराब हो चुके हैं। हम मौत की कगार पर हैं। प्लीज हमें बचाया जाए।
प्रधानमंत्री तक को लिखा खत
मां ने इस खत में यह भी लिखा कि मैं 50,000 रुपये लाई थी लगभग 35,000 खर्च हो चुके हैं। जिंदगी से थक चुकी हूं। बचा लिया जाए, या गोली मार दी जाए।
इस केस को सीबीआई को दिया जाए यह मेरी प्रार्थना है।
महिला ने यह पत्र होम मिनिस्टर ऑफ इंडिया, एसपी लखनऊ, सीओ देहरादून, सीओ थाना गाजीपुर, पुलिस चौकी मुंशी पुलिया, वूमेन वेलफेयर, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री उत्तराखंड, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति को भी भेजा है।