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‘बंटी-बबली’ टीम ने बेरोजगारों से ठगे करोड़ों

Sun, 18 Jan 2015 07:15 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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मेरठ के सर्व यूपी ग्रामीण बैंक में ऑफिस असिस्टेंट की नौकरी का झांसा देकर सूबे के अलग-अलग जिलों के 26 युवकों से एक करोड़ चार लाख रुपये ठगने के आरोपी राजकपूर सिंह को स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने दबोच लिया।
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वह शुक्रवार को किसी से मिलने बादशाहनगर चौराहा आया था। उसके पास से तीन मोबाइल फोन, 16 अलग-अलग बैंक और स्पोर्ट्स क्लब की फर्जी मुहरें और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का एक एटीएम कार्ड बरामद किया गया है।

एएसपी त्रिवेणी सिंह ने बताया कि बीते वर्ष फरवरी में राजकपूर की जनकपुरी दिल्ली निवासी गौरव से मुलाकात हुई थी। दोनों ने सर्व यूपी ग्रामीण बैंक मेरठ में ऑफिस असिस्टेंट के पद पर भर्ती का झांसा देकर 26 युवकों से चार-चार लाख रुपये वसूले थे।
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राजकपूर के साथ इस ठगी में रोहित, राजेंद्र कुमार वर्मा और अर्चना वर्मा भी शामिल थे। प्रत्येक अभ्यर्थी से फॉर्म भरवाने के नाम पर 30,000, लिखित परीक्षा के लिए 50,000, इंटरव्यू के लिए 50,000 और मेडिकल के नाम पर 30,000 रुपये एडवांस लिए जाते थे।

सभी लोगों में बराबर होता था बंटवारा

रकम रिजल्ट आने के बाद ली जाती थी। रकम का बंटवारा सभी लोगों में बराबर-बराबर होता था। राजकपूर को महानगर पुलिस को सुपुर्द कर एफआईआर दर्ज कराई गई है।

मूल रूप से बस्ती के छावनी में पचवस गांव निवासी राजकपूर के चाचा श्यामसुंदर दास अयोध्या में महंत हैं और हनुमानगढ़ी में रहते हैं। उनके पास रहकर ही राजकपूर ने हाईस्कूल की परीक्षा पास की।

कम नंबर आने पर वर्ष 2007 में वह घर से भागकर दिल्ली पहुंचा और दो साल तक कॉल सेंटरों में नौकरी की। इसके बाद राज ग्रुप के नाम से नोएडा में कंसल्टेंसी खोली।

उसने 500 रुपये प्रति अभ्यर्थी कमीशन लेकर कई लोगों को कॉल सेंटरों में नौकरी दिलाई। इसी दौरान उसकी मुलाकात भवानी पटनायक, अमित चौधरी और अमित झा से हुई और चारों बीटेक पास युवकों को नौकरी दिलाने का काम करने लगे।
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सभी अभ्यर्थी हो गए फेल

यहीं रामबाबू कामत उर्फ जीवन से उसकी मुलाकात हुई। दोनों ने रेलवे में नौकरी के नाम पर कई अभ्यर्थियों से छह लाख रुपये वसूले। फैजाबाद के रामजन्मभूमि थाना में इसका मुकदमा दर्ज है।

जनवरी 2014 में विनय गर्ग और राजेंद्र वर्मा के साथ उसने बैंक पीओ की नौकरी दिलाने के बहाने कई युवकों से 40 लाख रुपये ठगे।

एएसपी ने बताया कि राजकपूर ने जिन 26 अभ्यर्थियों से पैसा लिया था, वे सभी फेल हो गए। इस पर राजकपूर ने सर्व यूपी ग्रामीण बैंक की फर्जी वेबसाइट बनाकर इन अभ्यर्थियों को पास घोषित कर दिया।

अभ्यर्थियों ने जब मेरठ स्थित बैंक के ऑफिस जाकर जानकारी ली फर्जी वेबसाइट का पता चला। इस संबंध में मेरठ के मेडिकल कॉलेज थाना और कासगंज कोतवाली में आईटी एक्ट सहित अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
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