चित्रकूट की महिला से गैंगरेप तथा उसकी नाबालिग बेटी के साथ दुराचार के प्रयास के आरोपी पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के साथी विकास वर्मा, अमरेंद्र सिंह उर्फ पिंटू और रूपेश की जमानत अर्जी पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश उमाशंकर शर्मा ने खारिज कर दी।
कोर्ट ने कहा, जिस तरह धन व बाहुबल के आधार पर पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया गया और उसकी पुत्री को भी भयभीत करके दुष्कर्म की कोशिश की गई, उससे निश्चित रूप से किसी संवेदनशील व्यक्ति को ऐसा कोई आधार नहीं मिलता कि वह आरोपियों को जमानत पर छोड़े।
इससे पहले सरकारी वकील अभय त्रिपाठी ने आरोपियों की जमानत का विरोध करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस मामले की रिपोर्ट गौतमपल्ली थाने में दर्ज हुई थी। इसमें पीड़िता ने कहा है कि उसका गायत्री प्रजापति के पास आना-जाना था।
तीन वर्ष पहले गायत्री ने अशोक तिवारी के जरिए मंत्री आवास पर बुलाया और बालू का काम देने की बात कही। इसी दौरान पीड़िता को नशीला पदार्थ पिलाकर दुष्कर्म किया गया और अश्लील फोटो खींचकर ब्लैकमेल किया। आरोपियों ने कई महीनों तक दुराचार किया। आरोपियों ने पूर्व मंत्री गायत्री के साथ मिलकर उसकी नाबालिग पुत्री के साथ भी दुराचार का प्रयास किया।