मौर्या की इकलौती बेटी गायत्री (22) ने मंगलवार रात फांसी लगाकर जान दे दी।
हरिशचंद्र का कहना है कि गायत्री कई दिन से टीवी पर किसानों की मौत और भूकंप से मची तबाही की खबरें देखकर डिप्रेशन में थी इसलिए उसने आत्महत्या कर ली।
हालांकि, पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। पुलिस का कहना है कि गायत्री ने डिप्रेशन के चलते जान दी है। उधर, मानसिक रोग विशेषज्ञ का मानना है कि टीवी में ऐसी खबरें देखकर सभी को दुख होता है लेकिन कोई सुसाइड नहीं करता।
इसके पीछे जरूर कोई और वजह होगी। छात्रा का बैकग्राउंड पता करके ही उसकी मनोदशा के बारे में कुछ कहा जा सकता है।
हरीशचंद्र के मुताबिक मंगलवार शाम गायत्री घर पर अकेले थी।
उनकी पत्नी दिव्या किसी काम से पड़ोस में गईं थीं तो बड़ा बेटा तरुण एक शादी समारोह में गया था। रात करीब 8:30 बजे दिव्या घर पहुंचीं तो दरवाजा अंदर से बंद था। पुकारने पर भी काफी देर तक दरवाजा नहीं खुला तो उन्होंने गायत्री के मोबाइल पर कॉल की। कॉल रिसीव नहीं हुई।
इस पर दिव्या ने हरीशचंद्र और तरुण को इसकी जानकारी दी। दरवाजा तोड़कर घरवाले अंदर पहुंचे तो देखा की गायत्री का शव फंदे से लटक रहा था। एसओ देवेंद्र दुबे का कहना है कि गायत्री डिप्रेशन में थी।
नहीं मिला कोई सुसाइड नोट
उसने आत्महत्या की है, लेकिन सुसाइड नोट न मिलने से कारण स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि गायत्री की सहेलियों से पूछताछ की जाएगी। हो सकता है कि उसने सहेलियों से अपनी परेशानी से संबंधित बातें शेयर की हों।
पिता ने बताया कि गायत्री ने करामत डिग्री कॉलेज से बीते वर्ष बीए पास किया था। इसके बाद वह घर के पास ही एक इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर कोर्स कर रही थी।
उन्होंने बताया कि गायत्री टीवी पर कुछ दिन से सुबह-शाम किसानों की आत्महत्या और भूकंप की खबरें देख रही थी। इसी तनाव में उसने जान दे दी। उन्होंने गायत्री के आत्महत्या करने के पीछे किसी और वजह के बारे में जानकारी से इंकार किया है।
हरिशचंद्र का कहना है कि वह पढ़ने में सामान्य थी। घर पर कोई तनाव नहीं था। इकलौती बेटी होने से सभी उससे काफी प्यार करते थे।
मां से पूछती थी फांसी लगाने के तरीके
गायत्री चार दिन से घर से बाहर नहीं निकली थी। पिता ने बताया कि वह मां से फांसी लगाने से मौत के बारे में पूछा करती थी। फांसी कैसे लगाई जाती है? लोग फांसी से कैसे मर जाते हैं? कितनी तकलीफ होती है?
ऐसे कई सवाल वह मां से पूछा करती थी। उस वक्त परिवारीजन गायत्री की मानसिक स्थिति का अंदाजा नहीं लगा सके। हरिशचंद्र ने कहा कि उन्हें जरा भी आभास नहीं था कि बेटी यह कदम उठा लेगी।
वहीं मानसकि रोग विशेषज्ञ डॉ. देवाशीष टीवी में मौतों और तबाही का मंजर देखकर आत्महत्या करने का कोई औचित्य नहीं है। गायत्री यकीनन बहुत संवेदनशील रही होगी। अगर वह कुछ दिन से मां से ऐसे सवाल पूछ रही थी तो अभिभावकों को सतर्क हो जाना चाहिए था।
जरूर गायत्री के मन में कुछ न कुछ चल रहा होगा। हो सकता है कि वह किसी और वजह से तनाव में हो और टीवी देखकर पीड़ा उभरने से उसने आत्महत्या कर ली हो।