गुडंबा निवासी रिटायर्ड पुलिस इंस्पेक्टर मो. सईद ने गाजीपुर की टूर एंड ट्रैवेल कंपनी के संचालकों पर हज यात्रा के नाम पर 22.60 लाख रुपये हड़पने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज
कराया है।
रिटायर्ड इंस्पेक्टर का कहना है कि कंपनी संचालकों ने उनके साथ चार अन्य लोगों को हज का वीजा देने के बजाए विजिटिंग वीजा थमा दिया। इंस्पेक्टर अखिलेश पांडेय का कहना है कि ट्रैवेल एजेंसी के चार संचालकों पर धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज करके जांच की जा रही है।
रिटायर्ड इंस्पेक्टर ने बताया कि अगस्त 2016 को उन्होंने हज यात्रा के लिए गाजीपुर की अमीर हमजा टूर एंड ट्रैवेल्स कंपनी में संपर्क किया था।
कंपनी संचालक वाराणसी के नई सड़क निवासी जफर सिद्दीकी व उसके बेटे हुरैरा सिद्दीकी, गाजीपुर के दिलदारनगर निवासी मोबीन अंसारी व उसके बेटे हैदर अंसारी ने रिटायर्ड इंस्पेक्टर से बातचीत के बाद उन्हें मुंबई तक का एयर टिकट व ट्रैवेल एजेंसी का नाम लिखा एक बैग घर भेजवाया। बैग में हज उमरा करने का ब्यौरा लिखा था।
रिटायर्ड इंस्पेक्टर ने अपने व पत्नी सायरा के टिकट व वीजा के लिए 5.90 लाख रुपये कंपनी के खाते में जमा किए। रिटायर्ड इंस्पेक्टर के साथी सरवर आलम, सब्बीरखान व शाहनवाज खान की पत्नियों ने भी हज यात्रा के लिए 56 हजार, 55 हजार व 56 हजार रुपये जमा कराए।
चारों ने कंपनी के खाते में 22.60 लाख रुपये जमा करा दिया। बदले में कंपनी ने हज का वीजा देने के बजाए मक्का का विजिटिंग वीजा दे दिया। रिटायर्ड इंस्पेक्टर का कहना है कि वीजा मुंबई एयरपोर्ट पर उस वक्त दिया गया जब वह प्लेन में बैठ चुके थे। जैसे ही फ्लाइट मक्का पहुंची तो धोखाधड़ी का अहसास हो गया। हज का मकसद तो बर्बाद हुआ ही जगह-जगह जांच व प्रताड़ना अलग से सहनी पड़ी।
रकम लौटाने के नाम पर दिए चेक हुए बाउंस
मक्का से लौटते ही रिटायर्ड इंस्पेक्टर ने पुलिस से शिकायत करने की बात कही तो आरोपी समझौते को तैयार हो गए। उन्होंने पूरी रकम लौटाने का आश्वासन देते हुए एक चेक दिया। हालांकि, यह चेक बाउंस हो गया। इसके बाद रिटायर्ड इंस्पेक्टर जब भी तगादा करते तो ट्रैवेल एजेंसी संचालक जानमाल की धमकी देकर डरा देते।