पीड़ितों ने बताया कि ठगी के आरोपी कंपनी बंद करके भागने की तैयारी कर रहे थे। एसटीएफ अधिकारियों को उनकी मंशा के बारे में बताया गया जिसके बाद तत्काल पंकज और राजकुमार के मोबाइल फोन को सर्विलांस पर ले लिया गया। ठगी की पुष्टि होने के बाद एसटीएफ ने गुरुवार रात दोनों को उनके ऑफिस से ही दबोच लिया।
निजी फाइनेंस कंपनी में काम करता था संचालक
एसटीएफ की पूछताछ में पंकज ने बताया कि वह एक निजी फाइनेंस कंपनी में काम करता था। उसके दोस्त प्रभात सोनी ने खुद की कंपनी बनाकर मोटी कमाई का सुझाव दिया। इसके बाद पंकज ने नौकरी छोड़कर प्रभात के साथ अक्तूबर 2018 में मेट्रो सिटी सिक्योरिटी सर्विसेज नाम से अपनी कंपनी बनाई और नौकरी का झांसा देकर युवाओं को ठगना शुरू कर दिया।
रजिस्ट्रेशन कराने वालों को देते थे फर्जी पहचानपत्र
पीड़ितों ने बताया कि कंपनी में रजिस्ट्रेशन कराने वालों को ठग फर्जी पहचानपत्र देते थे। इससे उन्हें नौकरी मिलने का विश्वास हो जाता था। ट्रेनिंग के नाम पर युवाओं से मेट्रो सिटी सिक्योरिटी सर्विसेज के ऑफिस में ही काम कराया जाता था। उनसे कहा जाता था कि ट्रेनिंग समाप्त होते ही नियुक्ति कराई जाएगी।
युवाओं को देते थे 25 और बेरोजगारों को कंपनी से जोड़ने का लक्ष्य
एसटीएफ के अधिकारियों ने बताया कि ट्रेनिंग के दौरान युवाओं को 25 और बेरोजगार लोगों को कंपनी से जोड़ने का लक्ष्य दिया जाता था। नौकरी मिलने की उम्मीद में कुछ युवक-युवती लक्ष्य पूरा करने में लग जाते थे और लोगों को कॉल करके कंपनी के ऑफिस बुलवाते थे जबकि कुछ युवा 10-15 दिन बाद फर्जीवाड़े को भांपकर ऑफिस जाना बंद कर देते थे।