गोमतीनगर के विजयखंड निवासी इंजीनियर ने हजरतगंज कोतवाली में फ्लैट का झांसा देकर 22 लाख रुपये ठगने की रिपोर्ट दर्ज कराई है। पीड़ित का आरोप है कि बिल्डर और ब्रोकर ने मिलकर रुपये हड़प लिए। वहीं, अब पुलिस 15 लाख रुपये में समझौता कराने का दबाव डाल रही है।
निजी कंपनी के सिविल इंजीनियर सतीश चंद्र पांडे ने स्प्रिंग डेवलपर्स की वेबसाइट पर फैजाबाद रोड स्थित स्प्रिंग ग्रीन्स प्रोजेक्ट में फ्लैट लेने के लिए नाम व मोबाइल नंबर डाला था। इसके बाद रोसा कैपिटल इनवेस्टर प्राइवेट लिमिटेड से असीम चतुर्वेदी ने फोन किया। दिसंबर 2013 में असीम अशोक मार्ग के धन निर्माण कॉम्लेक्स स्थित रोशा कैपिटल के ऑफिस ले गया।
बकौल पांडे, रोशा कैपिटल के मालिक सौरभ रोशा ने खुद को स्प्रिंग डेवलपर्स का ब्रोकर बताया। ऑफिस में ही कंप्यूटर पर रोशा ग्रुप की वेबसाइट खोलकर स्प्रिंग ग्रीन्स प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी देते हुए पेमेंट की डिटेल्स के बारे में बताया।
आश्वस्त होने पर पांडे ने दो दिसंबर 2013 को करीब साढ़े आठ लाख रुपये का चेक देकर पत्नी नीता के नाम से स्प्रिंग ग्रीन्स फेज-टू में 205 नंबर फ्लैट बुक कराया। रोशा ने उन्हें अलॉटमेंट लेटर भी दिया। इसके बाद पांडे ने कई चेक व आरटीजीएस के माध्यम से कुल 22 लाख 87 हजार 750 रुपये जमा किए।
बिल्डर और ब्रोकर ने मिलकर की ठगी
बकौल पांडे, पूरा पैसा देने के बाद पता चला कि फ्लैट किसी और को दे दिया गया है। इस पर उन्होंने मई 2014 को सौरभ रोशा से संपर्क किया तो उसने गोलमोल जवाब देते हुए टरका दिया। संदेह होने पर उन्होंने स्प्रिंग डेवलपर्स को ई-मेल कर जानकारी मांगी। पता चला कि उनके नाम पर कोई फ्लैट बुक ही नहीं हुआ।
साथ ही बताया गया कि कि रोशा कैपिटल से जनवरी 2014 से ही व्यापारिक रिश्ते खत्म हो चुके हैं। सकते में आए इंजीनियर ने स्प्रिंग डेवलपर्स के जालान को फोन किया। जालान ने रोशा को बुलाकर समझौता कराने की बात कही। साथ ही नए रेट पर फ्लैट बुक कराने को कहा, लेकिन पांडे ने मना कर दिया। पीड़ित का आरोप है कि बिल्डर और ब्रोकर ने मिलकर साजिश रची है। साथ बताया कि दोनों ने इसी तरह कई लोगों से ठगी की है।
पीड़ित के अनुसार एक महीने से एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश कर रहे हैं। हजरतगंज कोतवाली में दो बार तहरीर देने के बाद बमुश्किल रिपोर्ट दर्ज हो सकी। बावजूद इसके पुलिस 15 लाख रुपये लेकर समझौते का दबाव बना रही है। उधर, जालान का कहना है कि रोशा कंपनी उनके लिए ब्रोकर का काम करती थी।
शिकायतें आने के बाद कंपनी से नाता तोड़ लिया गया। पांडे ने रुपये भी उनकी कंपनी को नहीं दिए थे। वहीं, रोशा कैपिटल के मालिक सौरभ रोशा का कहना है कि गलतफहमी के चलते ऐसा हो गया। पांडे से बात करके मामला सुलझा लिया जाएगा।