रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षा का पर्चा आउट कराने वाले एक और गिरोह का पर्दाफाश करते हुए यूपी एसटीएफ ने गिरोह के सरगना समेत चार लोगों को गुरुवार को यहां दबोच लिया।
ये सभी यहां उमराव सिनेमाहॉल के पास कुछ अभ्यर्थियों को पर्चा देने पहुंचे थे। इनसे पांच मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, चार सेट क्वेश्चन बैंक, दो प्रवेश पत्र, एक एटीएम कार्ड और 32,780 रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
गिरफ्तार आरोपियों में गिरोह का सरगना ग्राम भटपुरा, थाना गोसाईंगंज, सुल्तानपुर निवासी विजय बहादुर के अलावा राजस्थान के हिंडौन सिटी निवासी प्रहलाद व सवाई माधोपुर निवासी नरसीलाल और वाराणसी निवासी दिनेश तिवारी शामिल हैं।
दिनेश मूल रूप से बिहार के रोहतास का रहने वाला है। इस बार लोको पायलट की परीक्षा रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड कोलकाता करा रहा है।
नौ नवंबर को होना था पेपर
परीक्षा का पहला चरण लगभग दो माह पहले हो गया था जबकि दूसरे चरण में एप्टीट्यूड टेस्ट आगामी नौ नवंबर को होना है। एसटीएफ ने गिरोह के पास से इसी एप्टीट्यूड टेस्ट का ‘क्वेश्चन बैंक’ बरामद किया है।
इसे मिलान के लिए आरडीएसओ को भेजा जाएगा। एसटीएफ को लोको पायलट परीक्षा के पर्चे आउट कराए जाने के सिलसिले में राजस्थान पुलिस से महत्वपूर्ण सुराग मिले थे।
राजस्थान में विभिन्न परीक्षाओं के पर्चे आउट कराने के लिए कुख्यात नरसीलाल के पिछले दिनों यूपी में सक्रिय होने की सूचना के साथ ही यह भी पता चला था कि अभ्यर्थी राजेश कुमार ने इस गिरोह के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई हुई है।
इस पर एसटीएफ के एसएसपी अमित पाठक ने मामले की जांच के लिए अपर पुलिस अधीक्षक त्रिवेणी सिंह को जिम्मेदारी दी थी।
जांच टीम ने कुछ लोगों के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लेने के साथ ही पर्चा लीक कराने की साजिश रच रहे आरोपियों को पकड़ने के लिए घेराबंदी शुरू कर दी थी।
50 हजार रुपये एडवांस, नौकरी होने पर तीन लाख
एसटीएफ के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों का नेटवर्क पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली व गुजरात तक फैला है।
पूछताछ में आरोपियों ने कुबूल किया कि वे अभ्यर्थियों से 50 हजार रुपये एडवांस लेकर क्वेश्चन बैंक तथा सही उत्तर उपलब्ध करा देते हैं। चयन होने जाने के बाद उनसे तीन लाख रुपये वसूल करते हैं।
आरडीएसओ में काम के दौरान चुराया था क्वेश्चन बैंक का सेट
गिरफ्तार सरगना विजय बहादुर पहले आरडीएसओ में काम करता था। सेवाकाल में ही उसने आरडीएसओ से क्वेश्चन बैंक का एक सेट चुरा लिया था।
रेलवे व एसटीएफ अधिकारियों की मानें तो आरडीएसओ ने भर्ती परीक्षाओं के लिए एक क्वेश्चन बैंक बना रखा हैं। विभिन्न परीक्षाओं के लिए इसी से सवाल चयनित किए जाते हैं।
वह वर्ष 2011 में रिटायर हुआ था। डेढ़ सौ से अधिक अभ्यर्थियों से किया था संपर्क विजय ने अपने साथियों प्रहलाद, नरसीलाल और दिनेश के साथ एप्टीट्यूड टेस्ट के पेपर आउट कराने के लिए डेढ़ सौ से अधिक अभ्यर्थियों से संपर्क किया था।
इनसे तीन लाख रुपये तक की मांग की जा रही थी। इनमें से कुछ अभ्यर्थियों को लखनऊ तो कुछ को कोलकाता बुलाया गया था। आरोपियों से पूछताछ में सामने आया कि इन लोगों ने क्वेश्चन बैंक की फोटोकॉपी कराकर कई कोचिंग सेंटरों व अन्य लोगों को बेच दिया था। एसटीएफ जल्द ही इन कोचिंग सेंटर संचालकों से भी पूछताछ करेगी।