लखनऊ के कृष्णानगर के सराफ कुलदीप सिंह को लूटकर जान से मारने की साजिश उन्नाव के अजगैन निवासी पूर्व सपा नेता व ज्वैलरी कारोबारी सागर गुप्ता उर्फ रजत ने रची थी। सागर गुप्ता पर कुलदीप की 80 ग्राम ज्वैलरी का पेमेंट बाकी होने के साथ ही सराफ बाजार का लाखों रुपया बकाया था। कर्ज निपटाने के लिए उसने कुलदीप को निशाना बनाया।
पुलिस ने सागर गुप्ता और उसके साथी अजगैन के चमरौली निवासी शिखर दीक्षित उर्फ वीरू को गिरफ्तार कर वारदात का खुलासा कर दिया है। बदमाशों के पास से 11 लाख रुपये के जेवर बरामद हो गए हैं। लूट व हत्या में शामिल तीसरा आरोपी अजगैन के मलांव गांव में रहने वाला आशीष द्विवेदी फरार है। उसकी तलाश में पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं।
एसएसपी दीपक कुमार ने बताया कि सागर गुप्ता समाजवादी पार्टी युवजन सभा का पूर्व सचिव है। उसे व शिखर को बुधवार रात वीआईपी रोड बाराबिरवा चौराहे के पास से पकड़ा गया। सागर की उन्नाव के नवाबगंज में ही ज्वैलरी शॉप है जहां कुलदीप नाक की कील व कान की बालियां सप्लाई करने आते थे। सागर पर कुलदीप का 80 ग्राम ज्वैलरी का पेमेंट बाकी थी। इसके अलावा मार्केट में भी काफी उधारी थी। कुलदीप अक्सर 10-12 लाख की ज्वैलरी लेकर मार्केट आते थे।
यही वजह थी उसने कुलदीप को लूटने की साजिश रची और दोस्त शिखर व आशीष को साथ ले लिया। शनिवार को कुलदीप नवाबगंज की दुकानों में जेवर सप्लाई करके लखनऊ लौट रहे थे तो साजिश के तहत सागर ने उन्हें रोक लिया। उसने कहा कि रात हो गई है। वह लखनऊ ही जा रहा है। घर छोड़ देगा। इस पर कुलदीप उसके साथ कार में बैठकर अपने घर पहुंचे। रविवार सुबह वह जेवर लेकर उन्नाव के लिए निकले। इससे पहले ही सागर, शिखर और आशीष लखनऊ पहुंच चुके थे। तीनों पराग चुंगी के पास ही कुलदीप का इंतजार कर रहे थे।
गला कसकर व्हील डिस्क से किया वार
- फोटो : amar ujala
करीब साढ़े दस बजे कुलदीप रिक्शा से चुंगी पहुंचे तो सागर ने फिर उन्नाव जाने की बात कहकर साथ बैठा लिया। बंथरा क्रॉस करते ही रस्सी से उनका गला कस दिया और कार में पड़ी एलॉय व्हील डिस्क से सिर व चेहरे पर वार किए। कुलदीप की हत्या के बाद तीनों मुर्तजानगर नहर के किनारे पहुंचे और कार में पहले से रखे टिन के बक्से में शव डालकर पानी में फेंक दिया।
कुलदीप का मोबाइल फोन भी नहर में ही फेंक दिया गया। यहां से तीनों उन्नाव पहुंचे और जेवरों का बंटवारा कर लिया। पुलिस बक्सा बेचने वाले दुकानदार और मोबाइल फोन की लोकेशन के जरिए हत्यारों तक पहुंची।
कार की सीट के हेडरेस्ट क्लैंप में बंधी रस्सी से घोंटा गला
इंस्पेक्टर कृष्णानगर अंजनी कुमार पांडेय ने बताया कि कार सागर चला रहा था। उसने ड्राइविंग सीट के बगल में कुलदीप को बैठाया जबकि शिखर व आशीष पीछे बैठे थे। कुलदीप जिस सीट पर बैठे थे, उसके हेड रेस्ट के क्लैंप में नॉयलान की रस्सी बंधी थी। बंथरा क्रॉस करते ही पीछे बैठे बदमाशों ने रस्सी का एक सिरा कुलदीप की गर्दन में फंसाकर खींच दिया। उन्होंने हाथ-पैर मारे तो कार बेकाबू होने लगी। इस पर सागर ने कार किनारे खड़ी करके कार में रखे एलॉयव्हील डिस्क से सिर व चेहरे पर वार कर हत्या कर दी।
पिता से 25 साल से थे कारोबारी संबंध, बेटे ने किया विश्वासघात
कुलदीप का सागर के पिता प्रेमकांत से 25 साल से व्यापारिक संबंध थे। प्रेमकांत की मौत के बाद जब सागर ने कारोबार संभाला तब भी कुलदीप ही जेवरों की सप्लाई करते थे। बेटे जसप्रीत का कहना है कि 25 साल में उसके पिता ने जो भरोसा जमाया था, सागर ने उसका ही फायदा उठाया। वह तो सागर को बेटे जैसा मानते थे।
डेढ़ महीने पहले रची थी साजिश, घर छोड़ने के बहाने रेकी
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सागर ने कुलदीप को लूटकर हत्या करने की साजिश करीब डेढ़ महीने पहले ही रच डाली थी। घर तक छोड़ने के बहाने उसने कुलदीप के घर की लोकेशन भी ले ली थी। कुलदीप ने सागर से रविवार सुबह फिर उन्नाव जाने की बात कही थी। रविवार सुबह वह साढ़े आठ बजे ही लखनऊ पहुंच गया था। लखनऊ आते वक्त उसने नवाबगंज से ही जसवीर की दुकान से बक्सा खरीदकर कार में रख लिया था।
बोला अंकल दवा लेने आए थे, अब लौट रहे हैं
सागर ने बताया कि कुलदीप पराग चुंगी पर रिक्शे से पहुंचे तो वह पहले से ही वहां मौजूद था। रिक्शे से उतरकर कुलदीप ने दुकान से पूड़ी-सब्जी खाई। इसके बाद बस का इंतजार करने लगे। वह कार लेकर उनके पास पहुंचा कहा कि अंकल दवा लेने आया था। अब लौट रहा हूं। उन्नाव चल रहे हैं तो साथ ही बैठ जाइए।
नहर के पास मोबाइल की लोकेशन मिलने पर फंसा
सागर ने बहुत सावधानी बरती, लेकिन रविवार दोपहर करीब ढाई बजे शव ठिकाने लगाते वक्त वह मोबाइल स्विच ऑफ करना भूल गया। इसी गलती से पुलिस को उस पर शक हुआ। पुलिस सूत्रों ने बताया कि सागर के मोबाइल की लोकेशन शनिवार रात लखनऊ में मिली थी। रविवार सुबह करीब चार घंटे के लिए उसका मोबाइल स्विच ऑफ रहा। उस वक्त वह लखनऊ में था। इसलिए मोबाइल बंद कर लिया। उन्नाव के नवाबगंज पहुंचने पर उसने मोबाइल फोन ऑन किया। दोपहर ढाई बजे वह मुर्तजानगर नहर में शव ठिकाने लगा रहा था तो मोबाइल बंद करना भूल गया।