30 मार्च को एसपी एसटीएफ के पास 26 साल के सीए ने कॉल कर बताया कि एक लड़की से उसकी ऑनलाइन दोस्ती हुई। एक रात दोनों ने वीडिया कॉल पर बात की। अगली सुबह लड़की उसका न्यूड वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने लगी और फिरौती मांग रही है। युवक इतना डर गया कि उसे लग रहा कि आत्महत्या कर लेनी चाहिए। काउंसिलिंग कर उसकी दहशत कम की गई।
वीडियो कॉल पर आपत्तिजनक हाल में बातें बनीं मुसीबत
31 मार्च को एसपी एसटीएफ त्रिवेणी सिंह को 45 वर्षीय शख्स ने फोन कर बताया कि उन्हें धमकी मिली है कि उनका अश्लील वीडियो वायरल कर दिया जाएगा। एक लड़की के साथ वर्चुअल दोस्ती, वीडियो कॉल पर आपत्तिजनक हाल में बातें उनके लिए मुसीबत बन गईं।
प्रो. त्रिवेणी सिंह कहते हैं कि गैंग वीडियो कॉल के दौरान अश्लील हरकतें करने और निर्वस्त्र होने के लिए उकसाता है। जो लोग बहकावे में नहीं आते, उनके लिए डीप फेक तकनीक का इस्तेमाल होता है। इसमें कॉल के दौरान स्क्रीन शॉट लेकर उनकी फोटो का दुरुपयोग किया जाता है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर है यह
प्रो. सिंह बताते हैं कि डीप लर्निंग और फेक से मिलकर बना है डीप फेक। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर है। इससे किसी भी वीडियो में किसी का चेहरा दूसरे से बदला जा सकता है। कई बार इसे कंप्यूटर भी नहीं पकड़ पाता। इस तकनीक से किसी के व्यवहार और बोलने के तरीके की भी हूबहू नकल की जा रही है।
प्रो. त्रिवेणी सिंह कहते हैं कि बीते दिनों हमने मथुरा से गैंग पकड़ा। उससे काफी जानकारियां मिली हैं। दरअसल, तकनीक लगातार अपग्रेड हो रही है। गैंग एक सिम से ये बात नहीं करता। ऐसे में इन्हें पकड़ पाने में समय लग रहा है। लोगों को चाहिए कि किसी हाल में अजनबी नंबर से आने वाली वीडियो कॉल रिसीव न करें, नहीं तो पता भी नहीं चलेगा और आप डिजिटल ट्रैपिंग का शिकार हो जाएंगे।
इसके अलावा रिपोर्ट जरूर दर्ज कराएं। साइबर अपराधियों तक पहुंचने के लिए यह जरूरी है। प्रो. सिंह कहते हैं कि यह गैंग डीप फेक से महिलाओं की न्यूड फोटो तैयार कर उसके पैक सोशल मीडिया पर बेच रहा है। यह साइबर अपराधियों के लिए धंधा बनता जा रहा है।