सात साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद सिर कूंचकर बेरहमी से कत्ल के मामले में अदालत ने दरिंदे को फांसी की सजा सुनाई है।
विशेष अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) एसपी अरविंद ने इसे विरलतम श्रेणी का अपराध बताते हुए पंद्रह हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
फैसले में कहा गया है कि इस तरह का क्रूर और घिनौना अपराध करने वाला कतई उदारता या दया का पात्र नहीं है।
विशेष लोक अभियोजक राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि विवेचना में पुलिस ने डॉग स्क्वॉयड की मदद ली जिसकी निशानदेही के आधार पर भानु को गिरफ्तार किया गया तो उसने अपना जुर्म कुबूल कर लिया।
खुद सुनाई हैवानियत की दास्तां
उसने कुबूला कि रात में जब परिवार के सभी लोग सो रहे थे तो वह बच्ची को उठा ले गया और पास ही खंडहर में ले जाकर उससे दुष्कर्म किया।
बच्ची उसकी दरिंदगी के बारे में किसी को बता न दे, इसलिए ईंट से सिर और चेहरा कूंचकर उसकी हत्या कर दी।
इस मामले में अदालत के समक्ष अभियोजन पक्ष की तरफ से कुल 12 गवाह पेश किए गए।
कोर्ट ने कहा कि आरोपी का कृत्य अमानुषिक व पैशाचिक है। ऐसे अपराधी मानवता व समाज के लिए कलंक हैं। इनके प्रति उदारता व दया नहीं बरती जा सकती।
सोते वक्त बच्ची को उठा ले गया था
मामला कोतवाली देवां के ग्राम मामापुर का है। 18 जून 2012 की रात मासूम अपनी 13 वर्षीय बहन व 10 वर्षीय भाई के साथ घर के बाहर तख्त पर सोई थी।
उसकी मां बगल में चारपाई पर पांच वर्षीय बेटे के साथ लेटी थी। इसी बीच गांव का ही भानु यादव आया और उसे उठा ले गया।
सुबह जब परिवार के लोग उठे तो देखा बच्ची बिस्तर पर नहीं थी। तलाश करने पर उसकी लाश गांव के एक खंडहर के सामने मिली। बच्ची का सिर कुचला हुआ था। बच्ची के पिता ने भानु यादव पर शक जताते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी।