एसीपी क्राइम विवेक रंजन राय के मुताबिक, गिरोह के सरगना प्रमोद, राजेश और सुमन हैं जो फरार हैं। इंटरनेट के जरिए रिटायर्ड अधिकारी और कर्मचारियों की डिटेल जुटाते थे। गिरोह के सदस्य कॉल कर चिह्नित व्यक्ति को बात कर फंसाते थे। उनसे बैंक की गोपनीय जानकारी हासिल कर लेते थे। समीक्षा अधिकारी के मामले में जालसाजों ने उनके एसबीआई सचिवालय शाखा से खाते में इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा हासिल की थी। महाराष्ट्र, एमपी, हरियाणा सहित कई राज्यों में इनका नेटवर्क फैला हुआ है।
इस टीम ने किया खुलासा
जेसीपी क्राइम के मुताबिक, गिरोह का खुलासा करने में हजरतगंज के अतिरिक्त निरीक्षक अनिल सिंह, दरोगा परवेज आलम, साइबर क्राइम सेल के दरोगा सुरेश गिरी, शिशिर यादव, हेड कांस्टेबल फिरोज बदर, कांस्टेबल अजय प्रताप सिंह, रणधीर सिंह, अर्चित, अखिलेश, संतोष, अविनाश, हरि किशोर, शरीफ खान, अखिलेश पटेल, नीरज, सुनील, रमेश, अमजद खान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
40-50 सिम इस्तेमाल किए
पुलिस के मुताबिक, गिरोह का सरगना प्रमोद, राजेश और सुमन 2012 से ठगी के कारोबार में जुटे हैं। ये तीनों 15 से 20 मोबाइल अपने पास रखते हैं यह सभी मोबाइल सिम फर्जी नाम और पते पर लिए गए हैं इन मोबाइल से गांव के बाहर जंगल में आकर लोगों को कॉल किया जाता है ताकि लोकेशन पुलिस न पा सके। अब तक 40-50 सिम आईपी के लिए इस्तेमाल किए गए हैं।