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बेखौफ अपराधीः बेटी के सामने काट डाला पिता को

Mon, 09 Feb 2015 09:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ।
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अपराधियों में पुलिस का खौफ नहीं रह गया है। दबंगों ने रविवार को पीजीआई क्षेत्र में बेटी के सामने ही उसके पिता को मार डाला। बेटी प्रेमा चीखती रही और हमलावर बैजनाथ (55) को चाकू और बांके से वार पर वार करते रहे।
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विवाद शराब को लेकर था। शनिवार को बैजनाथ के ठेकेदार बेटे राम मिलन ने फूलचंद, हरिकेश व जगजीवन के साथ शराब पी लेकिन पैसे देने से इन्कार किया तो दोनों पक्षों में जमकर मारपीट हो गई। इसी का बदला लेने के लिए बदमाशों ने रविवार सुबह इस हत्याकांड को अंजाम दे दिया। पुलिस ने 4 के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर हरिकेश और जगजीवन के पिता सरजू को गिरफ्तार कर लिया है।

पीजीआई थानाक्षेत्र स्थित गांव झिलझिला का पुरवा निवासी राम मिलन ने बताया कि शनिवार को गांव के पास देशी ठेके की दुकान के पास फूलचंद, हरिकेश व जगजीवन मिल गए। सभी ने बैठकर शराब पी। इस दौरान फूलचंद और शराब पिलाने की जिद करने लगा। राम मिलन ने पैसे न होने का हवाला देकर मना कर दिया तो दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई।
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मारपीट के बदले में दी बेरहम मौत

इसमें फूलचंद और उसकी बहन समेत कई लोग घायल हो गए थे। हालांकि पुलिस ने बीच-बचाव कर मामला शांत करा दिया था। इसी का बदला लेने के लिये तड़के फूलचंद, हरिकेश, जगजीवन ने दो अन्य साथियों के साथ घात लगाकर राममिलन के पिता पर हमला कर दिया।

उसी समय, वहां प्रेमा भी पहुंच गई। पिता को पिटते देख चीखने-चिल्लाने लगी। हमलावरों ने उसके सामने ही चाकू व बांके से बैजनाथ के सिर, गर्दन व पैर पर वार किया जिससे वह लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़ा। प्रेमा ने शोर मचाया तो गांव के कई लोग खेतों की तरफ पहुंचे।

तब तक आरोपी भाग चुके थे। बैजनाथ को अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई। इस मामले में राम मिलन ने गांव के ही फूलचंद, उसके बेटे हरिकेश, जगजीवन, उसके पिता सरजू पर हत्या का केस दर्ज किया है।
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पुलिस पहले ही एक्शन लेती तो टल सकता था मामला

शराब को लेकर राममिलन और फूलचंद के बीच हुए विवाद में आधा दर्जन लोग घायल हुए थे। मौके पर पहुंची पुलिस भी महज औपचारिकता निभाकर चलती बनी। गांव वालों का कहना है कि अगर पुलिस ने उस समय कार्रवाई की होती तो बैजनाथ की जान बच जाती।

बैजनाथ की हत्या के बाद गांव में दहशत और तनाव का माहौल है। सन्नाटा पसरा हुआ है। बैजनाथ तो समझौता कराना चाहता थाबैजनाथ तो दोनों पक्षों में समझौता कराना चाहता था। यही कारण है कि तड़के जब फूलचंद और अन्य आरोपियों ने उसे बुलाया तो उनके पास पहुंच गया। उसे नहीं पता था कि ये हत्या के इरादे से आए हैं।
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