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लखनऊ: काकोरी में भीषण धमाका, कई मीटर में फैले शवों के टुकड़े, मलबे में तब्दील हुआ घर

Tue, 05 Jun 2018 01:17 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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मलबे में तब्दील हुआ घर
पटाखों के अवैध गोदाम में विस्फोट से लखनऊ का काकोरी इलाका सोमवार सुबह दहल उठा। धमाका इतना जोरदार था कि पटाखों का गोदाम उड़ गया और पास का मकान भी ढह गया। धमाके में अवैध पटाखा गोदाम का संचालक नसीर उर्फ नासिर (55) और उसकी बेटी समेत तीन की मौत हो गई। पास ही काम करने तीन मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

लखनऊ परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुजीत पांडेय ने बताया कि ठाकुरगंज के फरीदीपुर के आतिशबाज नसीर ने छह महीने पहले काकोरी में गांव सैथा के मजरा मुन्नालाल खेड़ा में संजय लोधी का मकान किराए पर लेकर उसमें पटाखों का गोदाम बना रखा था। वह सुबह आठ बजे बेटी नसरीन (18) को साथ लेकर बाइक से गोदाम पहुंचा था। सुबह करीब 10:30 बजे भीषण विस्फोट हो गया।

दरोगा समेत तीन निलंबित
धमाके के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार ने दरोगा रामकुमार सचान, आरक्षी विवेक व मुकेश यादव को लापरवाही में निलंबित करके विभागीय जांच शुरू कराई है। गोदाम का लाइसेंस 31 मार्च 2017 को ही खत्म हो गया था। तब नसीर ने जगह बदलकर बिना लाइसेंस के बारूद का जखीरा जुटाकर पटाखों का धड़ल्ले से कारोबार कर रहा था।
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धमाका
ऐसा खौफनाक मंजर... बिखरे पड़े थे धड़, पैर...
काकोरी के प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार ने बताया कि घटनास्थल पर मांस के लोथड़े गोदाम से काफी दूर तक बिखरे पड़े थे। कुछ दूर पर युवती का धड़ व पैर पड़ा था। इससे पता चला कि गोदाम संचालक की बेटी की मौत हो चुकी है। पास का मकान रामसरन का था जिसमें नमकीन बनती थी, वह भी ढह गया। इसमें दबने से कारीगर रामसरन उर्फ रामफेरन की भी मौत हो गई। वह बहराइच के रामगांव थाने के गांव जदी का रहने वाला था। हादसे में उसका ममेरा भाई रामप्रसाद और कुछ दूरी पर एक प्लॉट की नींव खोद रहे दो मजदूर घायल हुए हैं। उनकी पहचान लखीमपुर खीरी के ईसानगर थाने के गांव कटौली निवासी विनोद व लाल बाबू के रूप में हुई।
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धमाका
धमाके की आवाज कई किमी तक सुनाई पड़ी, जिससे मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई है। पुलिस ने जेसीबी बुलाकर मलबा हटवाया।

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धमाका
4 साल... 22 मौतें... धड़ल्ले से चल रहा अवैध पटाखों का कारेाबार
राजधानी में पुलिस व प्रशासन की नाक के नीचे पटाखों का अवैध कारोबार धड़ल्ले से संचालित हो रहा है। बीते 4 साल में पटाखा फैक्ट्रियों में विस्फोट से 22 लोगों की मौत हो चुकी है। मोहनलालगंज के सिसेंडी में 20 सितंबर 2014 को विस्फोट से 16 की मौत हुई और 20 घायल हुए। वहीं, 2015 में पारा में पटाखों में हुए विस्फोट में पति-पत्नी व बेटी की मौत हो गई। सोमवार को काकोरी में तीन की जान गई।
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धमाका
धमाका सोमवार सुबह करीब 11 बजे हुआ। धमाके के बाद पूरा मकान मलबे में बदल गया। धमाके की तीव्रता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आसपास के मकान की दीवारें भी गिर गईं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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काकोरी धमाका
बिजली कनेक्शन नहीं था, बारूद के बीच चूल्हे पर बनता था खाना-चाय-नाश्ता
धमाके की वजह नासिर द्वारा घर में जमा किया गया बारूद बताई जा रही है। यह तथ्य भी सामने आया है कि मुख्यमंत्री निवास से केवल 16 किमी. दूर स्थित इस घटना स्थल मुन्न्नालाल का खेड़ा में कोई बिजली कनेक्शन नहीं है। नासिर इस घर में आता तो रोशनी के लिए बोतल में तेल व बत्ती लगाकर बनाई लालटेन का उपयोग करता। यहां तक कि खाना व चाय-नाश्ता भी लकड़ी के चूल्हे पर तैयार किया जाता। आशंका जताई जा रही है कि बारूद में आग इसी वजह से लगी।
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काकोरी ब्लास्ट
नासिक के पड़ोस में ही रहने वाले मनोज कुमार ने अपने घर में दो वर्ष पहले ही सोलर पैनल लगवाए हैं। ताकि बिजली का बंदोबस्त हो सके। इसके लिए उन्हें सरकार से 1.30 लाख रुपये सब्सिडी मिली थी, लेकिन 1.94 लाख रुपये खुद भी लगाने पड़े थे। ताजा हादसे में उन्हें काफी नुकसान हुआ है, कई दो सोलर पैनल जहां उखड़ गए हैं, वहीं कई सोलर पैनलों का कांच चूर-चूर हो गया है।
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घरों के उखड़ गए दरवाजे
विस्फोट से बगल के मकान का दरवाजा उखड़ गया। जबकि उसका एक हिस्सा काफी दूर जाकर गिरा।
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