लखनऊ विश्वविद्यालय का हबीबुल्ला हॉस्टल हमेशा से चर्चा में रहा है।
हॉस्टल के अंत:वासी एवं विवि के उपाध्यक्ष रहे ज्ञानेंद्र सिंह उर्फ ज्ञानू के दौर से शुरू हुआ सिलसिला आज तक कायम है। हॉस्टल के छात्रों का हजरतगंज,आईटी चौराहा,बाबूगंज,डालीगंज के इलाके में शुरू से जबरदस्त प्रभाव रहा है।
जानकारों के अनुसार हॉस्टल में ज्ञानू व उनके समर्थकों के लिए लजीज भोजन होटल क्लार्क अवध से खाना आता था।
वर्चस्व की लड़ाई में अब तक हबीबुल्ला हॉस्टल के नौ छात्रों की हत्या हो चुकी है। बाबूगंज में फ्री में मिठाई लेने के विवाद ने एक बार फिर हॉस्टल को चर्चा में ला दिया है।
लविवि के पुरनियों की मानें तो हबीबुल्ला हॉस्टल सबसे पहले 90 के दशक में चर्चा में आया।
हॉस्टल में रहने वाले इलाहाबाद के ज्ञानेंद्र सिंह उर्फ ज्ञानू ने उपाध्यक्ष पद के लिए दावेदारी की। ज्ञानू व बलरामपुर हॉस्टल के उसके करीबी दोस्त संजय सिंह व ओंकार भारती बाबा का विवि में सिक्का चलता था।
समर्थकों के लिए लजीज खाना क्लार्क अवध,डुलीज रेस्त्रां,उत्तम नानवेज सेंटर या फिर,हुसैगंज चौराहे पर स्थित एक होटल से आता था।
ज्ञानू के चुनाव जीतने के बाद क्लार्क अवध की पार्टी लोगों को अब तक याद है। आपसी वर्चस्व में ज्ञानू की आईटी चौराहे पर हत्या कर दी गई।
हॉस्टल की बागडोर गोंडा के करनैलगंज के ओंकार भारती बाबा ने संभाली। बाबा ने महामंत्री व अध्यक्ष पद का चुनाव जेल में रहते हुए जीता था।
उनके बाद आजमगढ़ के बाहुबली अजय सिंह,हरदोई के अनिल सिंह वीरू,लखीमपुर खीरी के प्रद्युम्मन वर्मा वर्चस्व को लेकर लड़ते रहे।
इसी में अजय के खास रहे हेमेंद्र प्रताप सिंह उर्फ गुड्डू की बाबूगंज के मोड़ पर गोली मारकर हत्या की गई थी। कुछ ही दिन बाद अजय की भी हत्या कर दी गई।
इसके बाद अनिल सिंह ने कमान संभाली। महामंत्री का चुनाव जीता। इसी दौरान वीरू व उसके सर्मथकों ने ठेके को लेकर इंदिरानगर में गोलियां बरसाईं।
जिसमें अभिषेक सिंह और हरगोविंद सिंह विष्ट को जान से हाथ धोना पड़ा। फिर हरदोई के उपेंद्र सिंह उर्फ मानू ने कमान संभाली।
कमान संभालते ही चुनाव के दौरान उसके सबसे खास दोस्त हरदोई के धर्मेंद्र सिंह की हत्या कर दी गई। मानू चुनाव तो हारा,लेकिन जमीन,ठेके व टेंडर में उसकी पैठ हो चुकी थी।
पूर्वांचल के एक माफिया के करीबी ने मानू की हॉस्टल में ही हत्या करा दी। फिर खीरी गुट के मोहन वर्मा ने कमान संभाली।
मगर,एक चुनाव लड़ने के बाद विवि में चुनाव पर रोक लग गई और हॉस्टल शांत था। अब एक बार फिर से हॉस्टल चर्चा में है। देखना होगा कि पुलिस इस पर लगाम कैसे लगाएगी।