बबली रावत इटौंजा इलाके में तेज तर्रार कार्यकर्ता के रूप में जानी जाती थीं। किसानों व ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर वह थाना, तहसील व ब्लाक में संघर्ष करती रहती थीं। दो साल पहले बाराबंकी जिले में एक रिश्तेदार के अपहरण व उससे फिरौती के मामले को लेकर बबली ने बीकेटी थाने में काफी संघर्ष किया था। इसके बाद आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
वारदात कर फरार हुए आरोपी
मौके पर पहुंची क्षेत्राधिकारी बीकेटी डॉ. बीनू सिंह और प्रभारी निरीक्षक महेश चंद्र ने आरोपियों की तलाश शुरू की। लेकिन सभी फरार थे। मौके पर मौजूद बबली के भतीजे शिवम ने पुलिस को बताया कि पड़ोसी लक्ष्मण और उसके परिवारीजनों ने फावड़े से हमला किया था। बबली के सिर पर कई गंभीर चोटें आई थीं।
छिन गया शिवम का इकलौता सहारा
ग्रामीणों के मुताबिक, शिवम के पिता संतराम की तीन साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। कुछ दिन बाद उसकी मां भी संदिग्ध हालात में लापता हो गई। वह गांव के ही स्कूल में कक्षा पांच का छात्र है। बुआ बबली की मौत के बाद शिवम बेसहारा हो गया है और वारदात से डरा-सहमा है।
ग्रामीणों व रिश्तेदारों ने पूरे मामले में पुलिस व प्रशासन पर लापरवाही की आरोप लगाया है। रिश्तेदारों व ग्रामीणों का आरोप है कि मकान के सहन की जमीन के विवाद को लेकर बबली ने थाना व तहसील में कई बार गुहार लगाई, लेकिन हर बार अधिकारियों ने समझा-बुझाकर मामला टरका दिया। अगर अधिकारियों द्वारा मामले का स्थायी समाधान किया जाता तो युवती की हत्या नहीं होती।
विवाद को लेकर कई बार लगा चुकी थी गुहार
सांसद कौशल किशोर ने बताया कि बबली भाजपा के कुम्हरावां मंडल कार्य समिति की सदस्य व खानपुर बूथ की अध्यक्ष थी। मकान की सहन की भूमि के विवाद को लेकर सुदामा ने कई बार उससे गुहार भी लगाई।
सांसद ने बताया कि उन्होंने मामले को लेकर थाने से लेकर तहसील के अधिकारियों को फोन भी किया, लेकिन अधिकारियों ने लापरवाही बरती। इसके कारण सहन की जमीन को लेकर हुआ विवाद युवती बबली की मौत का कारण बना।