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पांच लाख की सुपारी देकर करा दी भाई की हत्या!

Mon, 09 Feb 2015 01:25 AM IST
विवेक त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ
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दवा कारोबारी सच्चानंद मंगलानी के बेटे हर्ष (16) की हत्या उसके ममेरे भाई अमित बत्रा ने अपने दोस्त सुजीत धानुक और दुर्गेश के साथ मिलकर की थी। हर्ष की हत्या करने के लिए अमित ने सुजीत से पांच लाख रुपये की सुपारी तय की थी।
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इरादा था कि हत्या के बाद हर्ष का शव ठिकाने लगा दिया जाएगा। वहीं, सुजीत ने फिरौती वसूलने के लिए उसके अपहरण की साजिश रची थी। पुलिस ने अमित और सुजीत सहित पांच लोगों को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा दिया।

डीजीपी एके जैन बताया कि हर्ष रामनगर रामगली में रहता था और सुजीत पास ही गोपाल गली में। सोमवार दोपहर सुजीत ने हर्ष को एक लड़की से मिलाने का बहाना बनाकर औरंगाबाद जागीर स्थित अपने अर्द्धनिर्मित मकान में बुलाया था।
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हर्ष के पहुंचने के बाद शाम करीब पांच बजे उसके ही साथ रहने वाला ममेरा भाई अमित और एक अन्य दोस्त दुर्गेश भी वहां आ गया। तीनों ने मिलकर हर्ष को घेर लिया और गला दबा दिया। इसके बाद तीनों ने मिलकर हर्ष को रस्सी से बांधा और मकान पर ताला लगाकर चले गए। पुलिस ने बुधवार देर रात हर्ष का शव बरामद किया था।

डीजीपी ने बताया कि हर्ष अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था, इसलिए अमित के मन में लालच आ गया।  पुलिस के मुताबिक, अमित ने हर्ष की हत्या के लिए पांच लाख रुपये की सुपारी तय की तो सुजीत ने भी उसके परिवारीजनों से फिरौती का तानाबाना बुन लिया। यही वजह है कि हर्ष की हत्या के बाद उसके मोबाइल फोन से एक सिमकार्ड निकालकर सुजीत फिरौती मांगने की तैयारी में था, लेकिन उसे वक्त नहीं मिल सका।

शव छिपाने वाले थे सुजीत के पिता-भाई

पुलिस टीम ने शनिवार रात आलमबाग नहर पुलिया के पास से अमित के अलावा सुजीत, उसके भाई सत्यम, पिता सज्जन और मोहल्ले के दुर्गेश को गिरफ्तार कर लिया। एसएसपी यशस्वी यादव का कहना है कि अमित, सुजीत व दुर्गेश ने हर्ष की हत्या की थी जबकि शव दफन करने के लिए गड्ढा खोदने में सज्जन और सत्यम भी साथ थे। डीजीपी ने पुलिस टीम को पुरस्कार देने की घोषणा की है।

चेन लूट में गिरफ्तार हुआ था अमित
कृष्णानगर पुलिस ने बताया कि इलाहाबाद के करेली भावापुर निवासी अमित पिता तीरथ दास बत्रा की बेकरी में काम करता था। वर्ष 2013 में इलाहाबाद के खुल्दाबाद थाना की पुलिस ने उसे चेन लूट के एक मामले में गिरफ्तार किया था। जमानत में छूटने के बाद कृष्णानगर निवासी रिश्तेदार उसे लखनऊ ले आए। कुछ दिन रिश्तेदार के घर रहने के बाद अमित रामनगर रामगली में हर्ष के घर रहने आ गया था।

छह माह से रच रहा था साजिश
अमित करीब छह महीने से अपने फूफा सच्चानंद की प्रॉपर्टी का वारिस बनने का खवाब देख रहा था। पुलिस हिरासत में उसने बताया कि अपना सपना पूरा करने के लिए उसने सबसे पहले हर्ष की संगत बिगाड़ने की साजिश रची। छह माह पूर्व उसने हर्ष को सुजीत से मिलाया। सुजीत की कई गर्लफ्रेंड थीं। उसने हर्ष को भी गर्लफ्रेंड से मिलाया।

शव गायब कर देने की थी तैयारी

अमित का कहना है कि कभी-कभार वह हर्ष को थोड़ी बियर भी पिला देता था। शुरू में वह हर्ष को औरंगाबाद जागीर स्थित मकान में बुलाकर पार्टी कराता था। दो-तीन महीने बाद हर्ष उनके अड्डे पर खुद पार्टी करने लगा।

अमित ने बताया कि हर्ष को मारकर वह उसका शव गायब करा देना चाहता था। शव न मिलने पर वह परिवारीजनों को हर्ष के किसी लड़की के साथ प्रेम संबंध और भागने की कहानी सुनाने वाला था।

पुलिस सही या पोस्टमार्टम रिपोर्ट
पुलिस के मुताबिक, हर्ष की हत्या सोमवार शाम ही कर दी गई थी। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हर्ष की मौत बुधवार रात होने की बात कही गई थी। शव की हालत भी ऐसी नहीं लग रही थी कि हत्या डेढ़ दिन पहले की गई है।

अधबने मकान के पड़ोस में रहने वाले भइय्यालाल ने भी मंगलवार शाम हर्ष और सुजीत को चबूतरे पर बैठे देखा था। अब सवाल यह है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट गलत है या पुलिस की थ्योरी। अगर पोस्टमार्टम रिपोर्ट सही है तो हर्ष हत्याकांड आखिर ऐसी कौन सी बात है जो पुलिस छिपाने की कोशिश कर रही है।

मौत से पहले घंटों तड़पा था हर्ष

हर्ष मंगलानी मौत से पहले घंटों तड़पा था। सुजीत ने बताया कि वह उसे कमरे में लेकर आया जहां कुछ देर बाद अमित और दुर्गेश भी आ गए। हर्ष अपने ममेरे भाई को देखकर हिचकिचाया और कमरे से बाहर निकलने की कोशिश की। रोकने पर उसने धक्का-मुक्की शुरू कर दी। तीनों ने मिलकर उसे काबू किया।

हर्ष ने शोर मचाने की कोशिश की तो अमित ने पीछे से उसकी गर्दन दबोच ली जबकि सुजीत और दुर्गेश ने उसके बाल पकड़कर मुंह पर थप्पड़-घूंसे मारे। हर्ष बेहोश हो गया तो तीनों को लगा कि उसने दम तोड़ दिया है। इसके बाद हर्ष के मुंह में कपड़ा ठूंसकर अंगोंछे से लपेट दिया। ऊपर से रस्सी बांध दी। यही रस्सी हर्ष के पूरे शरीर पर बांधी गई थी।

पुलिस का कहना है कि जब हर्ष को बांधकर आरोपी चले गए तब भी वह जिंदा था। इसके बाद मुंह में कपड़ा घुसा होने और अंगोंछे से नाक व मुंह ढकने से उसका दम घुटने लगा। हाथ-पैर बंधे होने से तड़प-तड़पकर उसकी मौत हो गई।

एसएसपी का कहना है कि मंगलवार दोपहर हर्ष का शव ठिकाने लगाने के लिए पांचों आरोपी मकान पहुंचे लेकिन उस वक्त बाहर आस-पड़ोस के काफी लोग खड़े थे। इसके बाद पांचों ने मकान के आंगन में ही शव दफन करने के लिए गड्ढा खोदा था। मकान में एक छोटा गड्ढा पहले से खुदा था।
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मोबाइल के इस्तेमाल से मना किया था

अमित ने सुजीत को वारदात के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से मना किया था। उसे जो भी बात कहनी होती थी सुजीत से मिलकर कहता था।

हर्ष के औरंगाबाद जागीर स्थित मकान पहुंचने की जानकारी मिली तो वह फूफा की दवा की दुकान में ही था। उसने दुर्गेश से बात की और केकेसी तिराहा पर मिलने के लिए बुलाया। इसके बाद मोबाइल फोन दुकान पर रखकर वह आटो से केकेसी पहुंचा और यहां से दूसरे साधन से औरंगाबाद जागीर चला गया।

लॉटरी के धंधे में हुई थी सुजीत से मुलाकात
अमित पहले याहियागंज में लॉटरी और ईनाम का धंधा करता था। यहीं उसकी मुलाकात सुजीत से हुई। सुजीत ने कुछ दिन अमित के साथ काम भी किया। महीना भर पहले अमित ने सुजीत को हर्ष की हत्या की योजना के बारे में बताया था।
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