फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बड़ा फैसला: दस साल बाद रेप का आरोपी बालिग करार!

Thu, 12 Mar 2015 08:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
खुद को नाबालिग साबित करने के लिए दस साल से पैंतरे पर पैंतरे चल रहे आशियाना सामूहिक दुराचार कांड के मुख्य आरोपी गौरव शुक्ला को बुधवार को फास्ट ट्रैक ने भी बालिग करार दिया।
विज्ञापन


अपने रसूख और कानूनी दांवपेंचों के सहारे खुद को नाबालिग साबित कर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत अपना मामला चलवाने का उसका मंसूबा ध्वस्त हो गया।

कोर्ट ने ट्रायल शुरू करने के लिए अगली तारीख 27 मार्च तय की है। इस दिन कोर्ट में गौरव शुक्ला पर आरोप तय किए जाएंगे। इसके पहले  जेजे बोर्ड उसे दो दफा बालिग करार दे चुका है जिसे उसने चुनौती दी थी।

दावा: गौरव के अनुसार 2 मई 2005 को सामूहिक दुराचार के दिन वह 16 वर्ष और 6 महीने का था।

असली उम्र: कोर्ट ने जन्म तिथि 14 मार्च 1987 मानी। यानी तब वह 18 वर्ष 1 महीना और 18 दिन का था।

इस तरह साबित हुई आरोपी की उम्र

फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दो महीने में सुनवाई कर उसकी अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने ट्रायल शुरू करने के लिए अगली तारीख 27 मार्च तय की है। इस दिन कोर्ट में गौरव शुक्ला पर आरोप तय किए जाएंगे।

इसके पहले जेजे बोर्ड उसे दो दफा बालिग करार दे चुका है। पिछले साल दिए गए जेजे बोर्ड के फैसले के खिलाफ उसने सेशन कोर्ट में अपील की थी, जिसकी सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में की गई।

अपने फैसले में कोर्ट ने कहा कि जेजे बोर्ड में गौरव शुक्ला की नर्सरी से लेकर कक्षा 10 की पढ़ाई का क्रम सिलसिलेवार साबित हो चुका है। इसमें नर्सरी में प्रवेश के दौरान उसने जो जन्म तिथि लिखवाई थी, उसका आधार नगर निगम से दिया गया सर्टिफिकेट था। ऐसे में उसे पूरी तरह विश्वसनीय माना जा सकता है।

फास्ट ट्रैक कोर्ट में गौरव शुक्ला की उम्र को लेकर प्रस्तुत सभी साक्ष्यों पर चर्चा हुई। उसके बाद जेजे बोर्ड द्वारा दिए गए फैसले के आधारों पर भी बहस की गई। इसके आधार पर उसकी अपील खारिज कर दी गई।

इस फैसले के बाद पीड़ित और उनके पिता बेहद खुश नजर आए और उन्होंने जल्द ही पूरा इंसाफ होने की उम्मीद जताई। वहीं उनके वकील जलज गुप्ता और एडवा प्रदेश अध्यक्ष मधु गर्ग ने कहा कि फास्ट कोर्ट कोर्ट में 27 मार्च को तारीख दी गई है।

इस तरह की चालबाजी

ऑब्जर्वेशन : क्या कहा फास्ट ट्रैक कोर्ट ने
पीड़िता के वकील जलज गुप्ता के अनुसार अपने निर्णय में कोर्ट ने जो कहा वह इस तरह है - साक्ष्यों के विश्लेषण से साबित होता है कि  नर्सरी से दसवीं तक गौरव शुक्ला की पढ़ाई का क्रम कही टूटा नहीं है।

गौरव की नर्सरी से लेकर कक्षा 10 तक की पढ़ाई का क्रम पूरी से साबित होता है। उसने नर्सरी में सेंट फ्रांसिस में एडमिशन लिया। यहां जन्मतिथि दर्ज करवाने में नगर निगम से मिला सर्टिफिकेट उपयोग किया गया।

सेंट फ्रांसिस में उसने कक्षा 4 तक पढ़ाई की और फिर फेल हो गया। कक्षा पांच में उसने सीएमएस में एडमीशन लिया, वहां से पास हुआ और लखनऊ पब्लिक कॉलिजिएट में कक्षा 6 में एडमिशन लिया।

यहां गौरव ने कक्षा 8 तक पढ़ाई की। इसके बाद उसने कक्षा 9 में शेरवुड एकेडमी में दाखिला लिया। वहां 31 अक्टूबर 2003 को निकाल दिया गया। लाइन ऑफ एजूकेशन एकदम इंटैक्ट है। यानी कहीं सिलसिला टूटा नहीं है।

टीसी, जो फर्जी साबित हुई

गौरव की ओर से हेरॉल्ड पब्लिक इंटर कॉलेज के दस्तावेज पेश किए गए। इसमें बताया गया कि यहां उसने 25 मार्च 2003 को कक्षा 9 में एडमिशन लिया। 2005 में वह यहां से कक्षा 10 की परीक्षा में शामिल हुआ है।

कक्षा नौ में इस एडमिशन में उसने बंगला बाजार के छाया पब्लिक स्कूल से कक्षा 8 पास करने की टीसी पेश की, जिसमें उसकी जन्मतिथि 2 अक्टूबर 1989 दिखाई गई थी। जेजे बोर्ड में छाया पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल कृष्णा मुरारी सिंह की गवाही हुई।

सिंह ने बताया था कि उनके स्कूल से गौरव शुक्ला को कोई टीसी जारी नहीं की गई है। वह उनके स्कूल का कभी छात्र रहा ही नही। साथ ही सिंह ने जब हेरॉल्ड स्कूल में दी गई टीसी को देखा तो कहा कि वह उनके स्कूल की टीसी नहीं है। उस पर उनके हस्ताक्षर भी नहीं है।

फैसले का आधार: नगर निगम का दस्तावेज
गौरव शुक्ला के छाया पब्लिक स्कूल में पढ़ने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। वहां से पेश की गई टीसी भी फर्जी है।  कक्षा 10 में जो जन्मतिथि उसने बताई, उसका कोई आधार भी यही टीसी है। इस टीसी में यह तिथि गौरव के चाचा ने लिखी थी उसके पिता या खुद गौरव शुक्ला ने नहीं। इसे कतई विश्वसनीय नहीं माना जा सकता।

ऐसे में सबसे पुख्ता साक्ष्य उसका फर्स्ट अटेंडेड स्कूल यानी सेंट फ्रांसिस स्कूल में नर्सरी में लिखवाई गई जन्म तिथि है। इस जन्म तिथि को नगर निगम से मिले सर्टिफिकेट के अनुसार लिखवाया गया है। इसलिए कोर्ट ने बोर्ड ने इसे आधार बनाने के फैसले को सही माना और उसे बालिग करार दिया।
विज्ञापन

इसलिए था जन्मतिथि का सारा खेल

दावा किया था कि...
गौरव शुक्ला की ओर से दिए गए साक्ष्यों में उसने अपनी जन्म तिथि 2 अक्टूबर 1989 बताई थी। जिसके अनुसार 2 मई 2005 यानी दुराचार करने के दिन उसकी उम्र 16 वर्ष और 6 महीने बताई जा रही थी।

... और असली उम्र थी
कोर्ट में प्रस्तुत किए गए गौरव शुक्ला के शैक्षिक रिकॉर्ड्स और साक्ष्यों के अनुसार कोर्ट ने जन्म तिथि 14 मार्च 1987 स्वीकारी गई। यानी 2 मई 2005 को उसकी उम्र 18 वर्ष 1 महीना और 18 थी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें