किशोरी के पीछे पड़े युवक ने पिटाई का बदला लेने के लिए उसकी मां को जिंदा जला दिया। गुडंबा थाना क्षेत्र अतरौली गांव में मंगलवार सुबह रफीक खां उर्फ शीबू (28) ने छत से किशोरी की मां जगावती (55) के ऊपर उस वक्त पेट्रोल उड़ेल दिया, जब वह खाना पका रही थी।
गंभीर रूप से झुलसी जगावती ने बुधवार सुबह सिविल अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस दौरान रफीक महिला के छोटे बेटे आलोक को फोन कर पुलिस में शिकायत करने पर अंजाम भुगतने की धमकी देता रहा। मृतका के बड़े बेटे शिवशंकर ने रफीक के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने रफीक को गिरफ्तार कर लिया है।
एएसपी ट्रांस गोमती दिनेश यादव ने बताया कि मूलरूप से पीलीभीत के बनकटी न्यारिया हुसैन निवासी रफीक दो साल से अतरौली गांव में किराये के मकान में रहकर राजमिस्त्री का काम करता था। गांव में ही रहने वाले राम कुमार रावत की छोटी बेटी से वह इकतरफा प्यार करता था।
एएसपी ने बताया कि रफीक ने कई बार किशोरी से मिलने की कोशिश की। परिवारीजनों को इसका पता चल गया। उन्होंने रफीक को चेतावनी दी, लेकिन वह नहीं माना। इस पर करीब ढाई महीने पहले रावत के परिवारीजनों और गांव के लोगों ने उसे पकड़कर पीटा और कमरे में बंद कर दिया था। इससे बौखलाया रफीक बदला लेने का मौका तलाश रहा था।
खौफनाक अंदाज में वारदात को दिया अंजाम
मंगलवार सुबह रफीक एक डिब्बे में पेट्रोल लेकर चोरी-छिपे रावत के मकान की छत पर चढ़ गया। उस वक्त रावत की पत्नी जगावती टिनशेड के नीचे खाना पका रही थीं। रफीक ने टिन शेड का एक टुकड़ा उठाकर छत से ही उनके ऊपर पेट्रोल उड़ेल दिया। जगावती के शरीर में आग लग गई।
चीख सुनकर डाक विभाग में नौकरी करने वाले शिवशंकर और आलोक ने कंबल डालकर किसी तरह आग बुझाई। गंभीर रूप से झुलसी जगावती को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। बुधवार सुबह जगावती की मौत के बाद परिवारीजनों ने गुडंबा पुलिस को पूरा घटनाक्रम बताया। इसके बाद रफीक को गिरफ्तार कर लिया गया।
तीन दिन भी पहले दी थी धमकी
एएसपी ने बताया कि तीन दिन पहले भी रफीक और रावत के परिवार वालों के बीच कहासुनी हुई थी। तब रफीक ने उन्हें अंजाम भुगतने की धमकी दी थी।
एएसपी ने बताया कि किशोरी के परिवारीजनों की तरफ से बीती 25 जनवरी को गुडंबा थाना में ही उसके खिलाफ धमकाने की रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
पुलिस से पूछताछ में उसने गांव में अपमान होने और प्रेमिका से न मिलने देने पर जगावती को जलाने की बात कुबूल ली है। एसएसपी ने आरोपी को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम को 5000 रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है।
छह महीने से कर रहा था कोशिशें
एएसपी ट्रांस गोमती ने बताया कि राम कुमार रावत गोंडा में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में निदेशक की कार का ड्राइवर है। वह महीने में सात-आठ दिन शहर से बाहर रहता था। इसी दौरान रफीक उसकी बेटी से संपर्क करने की कोशिश करता था।
एएसपी ने बताया कि करीब छह महीने से वह किशोरी से मिलने की कोशिश कर रहा था। रफीक इस वक्त बीकेटी के एक कोल्ड स्टोरेज में राज मिस्त्री का काम कर रहा था। किशोरी के चक्कर में वह यहां भी कई दिन से काम पर नहीं गया था।
फोन कर दी चुप रहने की धमकी
रफीक ने फर्जी आईडी से वोडाफोन कंपनी का एक सिमकार्ड खरीदा था। इस सिमकार्ड से ही उसने कई बार रावत की बेटी से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की। एएसपी ने बताया कि जगावती को जलाने के बाद कानूनी कार्रवाई का भय सताने लगा तो उसने फर्जी तरीके से लिए गए मोबाइल नंबर से रावत के छोटे बेटे आलोक को फोन कर शिकायत न करने की धमकी दी।
फर्जी आईडी पर एक्टिवेट था सिमकार्ड
आलोक से नंबर लेकर पुलिस ने तहकीकात कराई गई तो पता चला कि सिमकार्ड 19 जनवरी को पीलीभीत की एक दुकान से गोपाल की फर्जी आईडी पर लिया गया था। पूछताछ में रफीक ने बताया कि दुकान पर सौ रुपये देकर उसने आईडी प्रूफ दिए बिना सिमकार्ड लिया था।
उसने बताया कि दुकानदार खुद ही आईडी की व्यवस्था करके सिमकार्ड बेचता है। एएसपी ट्रांस गोमती ने गुडंबा पुलिस को दुकानदार के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार करने के निर्देश दिए हैं।
बहन को भी की थी जलाने की कोशिश
रफीक ने 23 जनवरी को किशोरी और उसकी बहन को भी पेट्रोल से जलाने की कोशिश की थी। परिवारीजनों का कहना है कि किशोरी अपनी बहन के साथ चारपाई पर सो रही थी तभी रफीक घर में घुस आया। उसने पेट्रोल का पलीता बनाकर दरवाजे से भीतर चारपाई तक लगा दिया। चारपाई में आग लग गई।
किशोरी को पैरों में जलन महसूस हुई तो वह चीखने लगी। शोर सुनकर परिवारीजन व आसपास के लोग आए और आग बुझाई। आलोक ने बताया कि बीते साल रक्षाबंधन की रात रफीक ने गांव के एक मकान में आग लगा दी थी। कुछ महीने पहले उसने एक छप्पर भी फूंक दिया था।
कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए बढ़ा दुस्साहस
अतरौली गांव में रफीक की दुस्साहसिक हरकतों को हवा देने में स्थानीय पुलिस ने अहम भूमिका निभाई। ग्रामीणों का कहना है कि वह शिकायत लेकर पुलिस के पास जाते, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। बीते एक साल में तीन-चार बार रफीक की शिकायत की गई पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने कहा कि अगर 23 जनवरी की रात की घटना पर ही पुलिस कार्रवाई कर देती तो शायद जगावती की जान बच जाती।
खुद को बताया डर फिल्म का शाहरुख खान
अपने किए पर अफसोस करने के बजाय रफीक खुद को हीरो मान रहा है। पुलिस के सामने उसने खुद को डर फिल्म का शाहरुख खान बताया। उसने किशोरी की तरफ इशारा करते हुए कहा कि अगर वह मेरी नहीं हो सकती तो किसी की नहीं होने दूंगा। गुडंबा पुलिस ने बताया कि हाईस्कूल पास रफीक ने किशोरी के लिए कई प्रेमपत्र लिखे, लेकिन भेजा नहीं। पुलिस को उसके पास से प्रेमपत्र मिले हैं।