राजधानी लखनऊ के निशातगंज निवासी हाईकोर्ट के वकील संजय शर्मा (35) की बुधवार शाम शहीद पथ पर गोली मारकर हत्या कर दी गई। वह शाम करीब चार बजे सिविल कोर्ट से घर जाने के लिए निकला था।
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रास्ते में अपने परिचित टीचर इंदिरानगर निवासी सौरभ मिश्रा को फोन कर मिलने के लिए शहीद पथ पर बुलाया। करीब सात बजे सौरभ शहीद पथ पर पहुंचे तो विराज कंस्ट्रक्शन के पास सड़क के किनारे संजय की हुंडई इयान कार खड़ी देखी।
सौरभ का कहना है कि वह सड़क के दूसरी तरफ था। अपनी बाइक छोड़कर सड़क पार की और संजय की कार की तरफ बढ़ा। पास जाते ही खिड़की से संजय का खून से लथपथ सिर लटकता देखकर उसके होश उड़ गए। उसने तत्काल संजय के भाई अजय को फोन कर सूचना दी।
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विभूतिखंड पुलिस मौके पर पहुंची और संजय को ट्रॉमा सेंटर ले गई। यहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डीआईजी रेंज आरकेएस राठौर का कहना है कि संजय के सिर पर गोली मारी गई है। सौरभ के साथ ही उसके परिवारीजनों और परिचितों से पूछताछ की जा रही है।
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मकान खाली कराने का चल रहा था मुकदमा
मामले की जांच करती पुलिस टीम
- फोटो : amar ujala
निशातगंज की सातवीं गली निवासी संजय शर्मा वकालत के साथ ही प्रॉपर्टी डीलिंग भी करता था। वह विवादित मकान सस्ते दामों में खरीद लेता था। इसके बाद कोर्ट में मुकदमा दाखिल कर मकान के किरायेदारों को हटवाकर उसे बेच देता था।
परिवारीजनों ने बताया कि उसने अपने मोहल्ले में ही दो मकान खरीदे थे। एक मकान तीन साल पहले व दूसरा कुछ दिन पूर्व ही खरीदा था। दोनों में किरायेदार रह रहे हैं। इन्हें हटाने के लिए संजय ने मुकदमा दाखिल किया था।
बुधवार को मुकदमे की सुनवाई थी। भाई अजय ने बताया कि शाम करीब चार बजे संजय ने अपनी पत्नी श्वेता को फोन कर मुकदमे में 28 अप्रैल की तारीख लगने की जानकारी दी थी। एएसपी उत्तरी विजय ढुल ने कहा कि प्रॉपर्टी के विवाद की पड़ताल की जा रही है।
गांव में आते-जाते सौरभ से हुआ था परिचय
घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मी
- फोटो : amar ujala
संजय मूलरूप से जौनपुर का रहने वाला था। उसके पिता वेदभूषण शर्मा वहीं वकालत करते हैं। चार भाई में वह सबसे बड़ा था। निशातगंज में वह पत्नी श्वेता और सात साल के बेटे व सीएमएस में कक्षा एक के छात्र कौस्तुभ के साथ रहता था। बाकी भाई अलग रहते हैं।
अजय ने बताया कि सौरभ महर्षि विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर है और अक्सर जौनपुर में उसके गांव आता-जाता था। वहीं उसकी मुलाकात संजय से हुई। दोनों में दोस्ती हो गई।
अजय ने पुलिस को बताया है कि सौरभ से भी उसका कुछ लेन-देन था। शायद इसीलिए उसने मिलने के लिए बुलाया था।
सौरभ का कहना है कि संजय ने उसे 6.30 से 6.55 के बीच चार बार कॉल की। उसने फोन उठाया तो मिलने के लिए शहीद पथ पर कमता पुल के नीचे बुलाया। वह कमता पुल पहुंचा और आसपास देखा तो संजय की कार नजर आ गई।
संजय के दाएं हाथ का पंजा चीथड़े हालत में मिला है। पुलिस को आशंका है कि वह कार में बैठा होगा और किसी ने बाहर से उसके सिर पर फायर किया। बचने के लिए उसने दायां हाथ आगे बढ़ाया। गोली उसके अंगूठे और पहली अंगुली के बीच के हिस्से को फाड़ती हुई सिर में घुस गई।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि संजय को दो गोली मारी गईं या एक ही फायर हुआ। पुलिस का मानना है कि संजय ने सौरभ को मिलने के लिए बुलाया और विराज कंस्ट्रक्शन के पास सड़क किनारे कार रोककर उसका इंतजार करने लगा। इसी दौरान बदमाश आए और उसे गोली मारकर भाग गए।
यह भी आशंका जताई जा रही है कि बदमाश संजय के साथ कार में ही बैठे थे। भीतर किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ और बदमाशों ने संजय को गोली मार दी।
पुलिस ने आसपास मौजूद ठेला-खोमचा वालों और पान की गुमटी में बैठे लोगों से पूछताछ की लेकिन कोई वारदात की जानकारी नहीं दे सका। लोगों ने गोली की आवाज सुनने से भी इन्कार किया।