हजरतगंज में नवल किशोर रोड स्थित राजश्री गर्ल्स हॉस्टल में रहकर मेडिकल की कोचिंग कर रही आजमगढ़ की रजिया इरशाद (21) शुक्रवार को कलाई की नस काटकर फंदे से लटक गई।
दोपहर करीब एक बजे पड़ोस के कमरे में रहने वाली उसकी सहेली मधु मोबाइल फोन का चार्जर लेने पहुंची तो दरवाजा भीतर से बंद मिला।
काफी प्रयास के बाद भी दरवाजा नहीं खुला तो अन्य छात्राएं एकत्र हो गईं। कुर्सी पर चढ़कर छात्राओं ने दरवाजे के ऊपर बने झरोखे से भीतर देखा तो रजिया दुपट्टे के सहारे फंदे से लटकी दिखी।
रजिया की मौत की खबर से सनसनी मच गई। हॉस्टल के वार्डेन व मैनेजर दुर्ग विजय सिंह और हजरतगंज पुलिस मौके पर पहुंच गईं। पुलिस ने दरवाजा तोड़कर कमरे की तलाशी ली, लेकिन कोई सुसाइड नोट नहीं मिला।
इंस्पेक्टर विजयमल यादव का कहना है कि कमरे में छात्रा का मोबाइल फोन मिला है, जिसकी बैटरी निकालकर अलग रख दी गई थी। परिवारीजनों व छात्रा की सहेलियों से पूछताछ की जा रही है।
नाश्ते के बाद बंद कर लिया था कमरा
हॉस्टल की छात्राओं ने बताया कि रजिया सुबह सामान्य नजर आ रही थी। छात्राओं ने उसे बाथरूम जाते और नाश्ता करते देखा था। नाश्ते के बाद वह हॉस्टल के पिछले हिस्से में स्थित अपने कमरे (रूम नंबर 46) में चली गई, जबकि बाकी छात्राएं कोचिंग के लिए निकल गईं। इसके बाद किसी ने रजिया को नहीं देखा।
वह कोचिंग भी नहीं गई थी। दोपहर में छात्राएं लौटकर आईं तो रजिया का कमरा बंद देखा। छात्राओं ने सोचा कि तबीयत खराब होने के चलते वह आराम कर रही होगी। इसी बीच मधु चार्जर लेने उसके कमरे की तरफ गई तब आत्महत्या का खुलासा हुआ।
मोबाइल में मौत का राज तलाश रही पुलिस
इंस्पेक्टर ने बताया कि रजिया की खुदकुशी की वजह जानने के लिए उसका मोबाइल फोन खंगाला जा रहा है। जिस तरह कमरे में मोबाइल फोन की बैटरी अलग मिली है, उससे आशंका जताई जा रही है कि रजिया ने मोबाइल फोन से ही परेशान होकर उसकी बैटरी निकालकर अलग रख दी होगी।
इंस्पेक्टर का कहना है कि रजिया ने अंतिम बार किससे बात की? यह जानने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
हॉस्टल में रिजर्व रहती थी छात्रा
हॉस्टल वार्डेन ने बताया रजिया काफी रिजर्व रहती थी। साथी छात्राओं से उसका मिलना-जुलना बहुत कम था। कोचिंग से आने बाद वह सीधे अपने कमरे में चली जाती थी। काम होने पर ही वह कमरे से बाहर आती थी। बाकी समय वह अपनी पढ़ाई किया करती थी। रजिया की मौत की खबर सुनकर पड़ोस हॉस्टल की छात्राएं पहुंची लेकिन उसके बारे में ज्यादा जानकारी से इंकार कर दिया।
उधर, परिवारीजनों से बातचीत में पता चला है कि रजिया ने सुबह करीब आठ बजे पिता को फोन किया था। लगभग पांच मिनट बातचीत की। इसके बाद दोबारा संपर्क करने की बात कहकर उसने फोन काट दिया था। पिता ने पुलिस को बताया सुबह हुई बातचीत बेटी पर किसी तरह का कोई दबाव या परेशान नहीं लग रही थी।
तीन साल से कर रही थी मेडिकल की तैयारी
इंस्पेक्टर ने बताया कि रजिया आजमगढ़ जमावा फूलपुर गांव निवासी लेखपाल इरशाद अहमद की चार बेटी और एक बेटे में सबसे छोटी थी। वह बीते तीन साल से राजश्री हॉस्टल में रहकर मेडिकल की तैयारी कर रही थी। इंदिरानगर के एक हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही उसकी रिश्तेदार नाजिया बानो ने बताया कि सुबह करीब आठ बजे रजिया से फोन पर बात हुई थी।
नाजिया रोज दोपहर को उसके कमरे पर खाना लेकर आती थी। शुक्रवार को भी वह हॉस्टल पहुंची तो कमरा बंद था। उसने रजिया को फोन करने की कोशिश की लेकिन फोन नॉट रीचेबल बताता रहा। सहेलियों से पूछने पर उन्होंने भी जानकारी से इंकार कर दिया। इसी बीच मधु चार्जर लेने रजिया के कमरे पहुंच गई।
‘आपकी विश जरूर पूरी करूंगी भाई’
रजिया के कमरे से पुलिस को एक टाइम टेबल का चार्ट मिला है जिसमें उसने अपनी भावनाएं लिखी हैं। चार्ट के एक किराने पर रजिया ने लिखा है, ‘भाई मैं आपकी विश जरूर पूरी करूंगी।’
नाजिया ने बताया कि रजिया का बड़ा भाई आजमगढ़ में ही डॉक्टर है। वह भी रजिया को डॉक्टर बनाना चाहता था। हो सकता है कि रजिया पर इसका ही दबाव हो। इससे पहले वह दो बार सीपीएमटी की परीक्षा में असफल हो चुकी है। पुलिस की आशंका है कि भाई की इच्छा पूरी न कर पाने और पढ़ाई के दबाव में ही उसने अपनी जान दे दी होगी।
खुदकुशी से सहमी छात्राओं ने छोड़ा हॉस्टल
रजिया की खुदकुशी से हॉस्टल में रहने वाली अन्य छात्राएं काफी सहमी हैं। कई छात्राओं ने मैनेजर को प्रार्थनापत्र देकर हॉस्टल छोड़ दिया और अपने घर लौट गईं तो कुछ छात्राओं ने दूसरे हॉस्टल में शिफ्ट कर लिया है। हॉस्टल मैनेजर दुर्ग विजय ने छात्राओं को समझाने की कोशिश की लेकिन वह नहीं मानीं।